नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड NDDB की अत्याधुनिक OPU-IVEP-ET फैसिलिटी से एम्ब्रियो ट्रांसफर के जरिए एक पुंगनूर बछड़े के जन्म हुआ है. इसकी जानकारी एनडीडीबी की ओर से दी गई. इस स्वदेशी मवेशी के संरक्षण और जेनेटिक सुधार के लिए NDDB के चल रहे प्रयासों में ये एक बड़ा मील का पत्थर है, जिसमें असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. गौरलतलब है कि आंध्र प्रदेश के चित्तूर ज़िले की मूल निवासी पुंगनूर नस्ल, दुनिया की सबसे छोटी और सबसे ज़्यादा लुप्तप्राय मवेशी नस्लों में से एक है.
पुंगनूर क्षेत्र के शासकों के संरक्षण में विकसित यह अनोखी नस्ल अपनी असाधारण सूखा सहनशीलता, फीड दक्षता और दक्षिण भारत की पारंपरिक पशुधन प्रणालियों के साथ गहरे जुड़ाव के लिए जानी जाती है. अपनी विरासत मूल्य के लिए पहचानी जाने वाली पुंगनूर गाय को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से सराहा है.
पीएम संरक्षण पर दिया था जोर
पीएम मोदी इसके भारत की राष्ट्रीय विरासत के हिस्से के रूप में ऐसे स्वदेशी जेनेटिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व पर जोर दिया है.
यह सफल जन्म नस्ल संरक्षण के लिए विज्ञान और नवाचार का लाभ उठाने, भारत के पशुधन क्षेत्र की स्थिरता, उत्पादकता और लचीलेपन को सुनिश्चित करने के लिए NDDB की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है.
OPU-IVEP-ET फैसिलिटी भारतीय डेयरी किसानों के लिए इन उन्नत प्रजनन तकनीकों को सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में काम करना जारी रखे हुए है.
वहीं दूसरी ओर एनडीडीबी के मेहसाणा में ट्रेनिंग सेंटर, मानसिंह इंस्टीट्यूट ऑफ़ ट्रेनिंग ने “डेयरी प्लांट इक्विपमेंट के ऑपरेशन और मेंटेनेंस” पर छह दिन का ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया.
इस प्रोग्राम में कोल्हापुर और मांड्या मिल्क यूनियन और मदर डेयरी और विद्या डेयरी के पार्टिसिपेंट्स ने हिस्सा लिया.
ट्रेनिंग प्रोग्राम में पाश्चराइज़र, सेपरेटर, होमोजेनाइज़र, सैशे मशीन और अलग-अलग पंप और वाल्व जैसे डेयरी इक्विपमेंट के कुशल ऑपरेशन और मेंटेनेंस को कवर किया गया.
इसमें यूटिलिटीज़ की प्रभावी हैंडलिंग और डेयरी सेक्टर में सेफ्टी मैनेजमेंट के महत्व पर भी सेशन शामिल थे.
ट्रेनिंग के दौरान, पार्टिसिपेंट्स को बनास डेयरी और नानी गिडासन DCS का दौरा करने का मौका मिला, जहाँ उन्होंने अधिकारियों के साथ बातचीत की और प्रैक्टिकल जानकारी हासिल की.










