Home मछली पालन PM-MKSSY के क्या हैं फायदे, जानें कौन कर सकता है आवेदन
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PM-MKSSY के क्या हैं फायदे, जानें कौन कर सकता है आवेदन

चिलचिलाती गर्मी में मछलियों को सूखा चारा नहीं देना चाहिए.
प्रतीकात्मक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

नई दिल्ली. सरकार मछली पालन को भी बढ़ावा देने का काम कर रही है. इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत की गई है. ताकि मछली पालने और पकड़ने वालों को फायदा पहुंचाया जा सके और उनकी इनकम को बढ़ाया जा सके. वहीं सरकार की तरफ से प्रधान मंत्री मत्स्य किसान समृद्धि-सह योजना (PM-MKSSY) की योजना भी चल रही है. इस योजना के तहत आप लोन लेकर अपना काम शुरू कर सकते हैं और फिशरीज सेक्टर से कमाई करके अपनी आय बढ़ा सकते हैं.

मत्स्य किसान, मछुआरे तथा मत्स्य क्षेत्र की सूक्ष्म और लघु इकाइयों को रोज के कामों के लिए पूंजी, पूंजी निवेश और बिक्री के लिए लगातार वित्तीय सहायता की आवश्यकता होती है. व्यक्तिगत बचत या अनौपचारिक साहूकारों पर निर्भर रहना अस्थायी समाधान है. क्योंकि इसमें उच्च ब्याज दरें और अस्पष्ट शर्तें होती हैं. छोटे और सीमांत किसान अक्सर कर्ज के चक्रव्यू में फंस जाते हैं. ऐसे में लोन लेकर आप अपना अच्छा काम

PM-MKSSY कैसे मदद करता है
डिजिटल क्रेडिट मॉड्यूल राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफार्म (NFDP) पर ऑनलाइन लोन आवेदन और ट्रैकिंग की सुविधा देता है.

कई लोन योजनाओं तक पहुंच मात्स्यकी लोन के साथ-साथ बैंक की अन्य सामान्य योजनाएं जो मत्स्य क्षेत्र में भी आवेदन किया जा सकता है.

डिजिटाइज्ड लोन सुविधा – सभी राष्ट्रीयकृत बैंक एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं ताकि लोन आवेदन किया जा सके.

सहकारी ऋण सहकारी क्षेत्र के लिए NCDC के माध्यम से लोन सुविधा.

सम्मान राशि ऋण वितरण के बाद एक बार की वित्तीय सहायता पांच हजार तक दी जाएगी.

कौन आवेदन कर सकता है?
मछुआरे, मत्स्य किसान, मत्स्य श्रमिक, विक्रेता, सूक्ष्म एवं लघु मत्स्य उद्यम एकल स्वामित्व फर्म, साझेदारी फर्म, कंपनियाँ, एलएलपी, सोसायटी

सामुदायिक संस्थाएँ – सहकारी समितियाँ, महासंघ, स्वयं सहायता समूह (SHGS), मत्स्य उत्पादक संगठन (FFPOS), ग्राम स्तर संगठन और मत्स्य क्षेत्र में स्टार्टअप.

इसका फायदा क्या है
बैंक से लोन के लिए बिना परेशानी आवेदन.

पसंदीदा बैंक व शाखा में ऋण के लिए आवेदन.

लोन के सभी विकल्पों की जानकारी.

लोन वितरण के बाद सफलता शुल्क के रूप में वित्तीय सहायता.

Written by
Livestock Animal News Team

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