नई दिल्ली. फरवरी का महीना एक ऐसा महीना है, जब मौसम बदलता है. दिन गर्म और रात में ठंडी हो सकती है. ऐसे में अगर आप मुर्गी पालक हैं तो आपको इस महीने में मुर्गी पालन में खास ध्यान देने की जरूरत होती है. क्योंकि दिन गर्म और रात में ठंड होने की वजह से मुर्गियों को सर्दी जुकाम और सांस संबंधित बीमारियां हो सकती हैं. इससे बचाव करना जरूरी है. एक्सपर्ट कहते हैं कि ठंड से बचाव के लिए शेड के पर्दों को रात में बंद रखना चाहिए. जबकि दिन के समय में इसे खोला जा सकता है. ताकि धूप अंदर आ सके.
एक्सपर्ट कहते हैं कि फरवरी के महीने में मुर्गियों के लिए बिछावन के तौर पर सूखे भूसे का इस्तेमाल करें उन्हें गुनगुना पानी देते रहें. आपको बता दे कि फरवरी के शुरुआती दिनों में कुछ इलाकों में ठंड रहती है तो कुछ इलाकों में गर्मी भी पड़ने लगती है. आप अपने इलाके के हिसाब से तैयारी कर सकते हैं और मुर्गियों का ख्याल रख सकते हैं.
क्या-क्या उपाय करें
आमतौर पर रात के समय में शेड की दीवारों पर तिरपाल या पर्दे का इस्तेमाल जो ठंड से करते चले आ रहे हैं उसे करते ही रहें.
अगर दिन में धूप निकल रही है तो पर्दे को खोल दें. ताकि पोल्ट्री फार्म के अंदर धूप भी आए और इससे हवा का संचार भी हो सकेगा जिससे अमोनिया गैस आसानी से बाहर निकाल जाएगी.
फरवरी के महीने में सूखी लकड़ी का बुरादा, धान की भूसी या चोकर का बिछावन मुर्गियों के लिए तैयार करना चाहिए.
अगर पहले से से बना रखा है और उसमें नमी है तो तुरंत बदल देना चाहिए. नहीं तो इससे मुर्गियों को बीमारियां घेर सकती हैं.
मुर्गियों को पानी देने में खास ख्याल रखें. मुर्गियों को इस महीने में भी ठंडा पानी न दें. हल्का गुनगुना पानी ही पिलाएं. इससे उनकी पाचन क्रिया ठीक रहती है और वह अस्वस्थ भी नहीं होती हैं.
इसी मौसम में रानीखेत और सीआरडी जैसी बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. पशु चिकित्सक की सलाह पर मुर्गियों को वैक्सीन जरूर लगवा देना चाहिए.
मुर्गियों के फीड में पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए. जिससे उनकी जरूरतें पूरी हो जाएं और इससे उनके उत्पादन पर भी असर न पड़े.
फीडर और ड्रिंकर को साफ करना भी बेहद जरूरी है. क्योंकि गंदे फीडर और ड्रिंकर से मुर्गियों को बीमारियां हो सकती हैं.
निष्कर्ष
यदि किसी मुर्गी की फार्म के अंदर मौत हो जाती है तो उसे तुरंत फॉर्म से हटना चाहिए और उसका निस्तारण करना चाहिए ताकि अन्य मुर्गियों में बीमारी ना पड़ें.










