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Seaweed: समुद्री शैवाल की खेती को बढ़ावा देने के लिए इंपोर्ट होंगे बीज, पढ़ें क्या होगी शर्त

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने नए आयात दिशा-निर्देशों के मुताबिक समुद्री शैवाल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. मंत्रालय की ओर से भारत में जीवित समुद्री शैवाल के आयात के लिए दिशा-निर्देश अधिसूचित किए गए हैं. बताया जा रहा है कि इजाजत के चार हफ्तों के भीतर आयात परमिट जारी किया जाएगा. इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और जैव सुरक्षा बनाए रखते हुए तटीय इलाकों में समुद्री शैवाल उद्यमों को बढ़ावा देना ताकि लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो और स्थिर आजीविका सुनिश्चित की जाए. दावा किया जा रहा है कि ये कदम मछुआरे समुदाय का सामाजिक-आर्थिक उत्थान सुनिश्चित करेगा.

इस बारे में नॉटीफाइ दिशा-निर्देश से विदेशों से बेहतरीन क्वालिटी की बीज सामग्री या जर्मप्लाज्म के आयात की सुविधा मिलेगीत्र जिससे किसानों को उत्तम बीज स्टॉक तक पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी. भारत में अभी समुद्री शैवाल उद्यमों को व्यावसायिक रूप से कीमती प्रजातियों के लिए पर्याप्त मात्रा में बीज की उपलब्धता और समुद्री शैवाल की प्रचलित प्रजाति कप्पाफाइकस के बीज की गुणवत्ता की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.

बनाया गया है समुद्री शैवाल पार्क
बताते चलें कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योयाना (पीएमएमएसवाई) केन्द्र सरकार की प्रमुख योजना है. जिसमें समुद्री शैवाल क्षेत्र में क्रांति लाने की योजना शामिल है. इसका टारगेट 2025 तक देश के समुद्री शैवाल का उत्पादन 1.12 मिलियन टन से बढ़ाना है. इसके तहत सरकार ने समुद्री शैवाल का उत्पादन बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं. इसी सिलसिले में तमिलनाडु में 127.7 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ मल्टीपर्पस समुद्री शैवाल पार्क की स्थापना की गई है. मंत्रालय की ओर से जारी किए गए दिशा निर्देश में जीवित समुद्री शैवाल के आयात प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार की गई है. जिसमें जीवित समुद्री शैवाल के आयात के लिए नियामक ढांचा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना, शैवाल को कीटों और बीमारियों से बचाने की आवश्यक प्रक्रियाएं, संभावित जैव सुरक्षा के जोखिम मूल्यांकन तथा संबंधित निगरानी को और मजबूत करने के लिए आयात उपरांत निगरानी शामिल है.

उत्पादन को बढ़ावा देने में मिलेगी मदद
यह दिशानिर्देश समुद्री शैवाल के रिस्पांसिबल उत्पादन को प्रोत्साहित करेगा और इससे पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक विकास भी सुनिश्चित होगा. नए समुद्री शैवाल की किस्मों के आयात से रिसर्च और विकास को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे लाल, भूरे और हरे शैवाल प्रजातियों का विविधतापूर्ण उत्पादन बढ़ेगा. इससे समुद्री शैवाल प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन उद्यमों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा और गांवों में अतिरिक्त आजीविका उत्पन्न होने के साथ ही देश से समग्र निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. दिशानिर्देशों के अनुसार भारत में जीवित समुद्री शैवाल के आयात के लिए मत्स्य विभाग को एक विस्तृत आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है जिसपर भारतीय जल क्षेत्र में विदेशज जलीय प्रजाती लाने से संबंधित समिति द्वारा अनुमति दी जाएगी.

इतने दिनों जारी होगा इंपोर्ट परमिट
इसके चार सप्ताह के भीतर विभाग आयात परमिट जारी करेगा जिससे गुणवत्तापूर्ण समुद्री शैवाल जर्मप्लाज्म का आयात हो सकेगा. यह दिशानिर्देश सुरक्षित, सुचारू और दायित्वपूर्ण संचालन सुनिश्चित करते हुए भारत में जीवित समुद्री शैवाल के आयात की व्यापक नियामक प्रक्रिया ढांचा प्रदान करता है. भारत सरकार का मत्स्य पालन विभाग, रिसर्चर, उद्यमियों और खेतिहरों को नए अवसरों का लाभ उठाने और समुद्री शैवाल उद्योग के विकास में योगदान के लिए प्रोत्साहित करता है.

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