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UP में जमुनापारी नस्ल की बकरियों को लेकर इस योजना पर काम कर रही है सरकार, जानें क्या होगा फायदा

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प्रतीकात्मक फोटो:

नई दिल्ली. बकरियों की जमुनापारी नस्ल उत्तर प्रदेश में मूलरूप से यमुना, चम्बल और क्वारी नदियों के किनारे पायी जाती हैं. जमुनापारी नस्ल की बकरियां सबसे ज्यादा वजन और दूध उत्पादन में देशभर में पाई जाने वलाी 32 स्थानीय नस्लों में पहला स्थान रखती है. भारत की महत्वपूर्ण स्थानीय नस्ल को संरक्षित करने के मकसद से इटावा जिले में पहले से ही संचालित भदावरी भैस और जमुनापारी प्रक्षेत्र में ओपन न्यूक्लियर ब्रीडिंग फार्म चलाया जाना प्रस्तावित है. इसी मकसद के तहत “जमुनापारी बकरियों का सुधार एवं संरक्षण योजना” की शुरुआत किये जाने का फैसला लिया गया है.

बकरी पालन व्यवसाय आज के परिवेश में एक सफल नए कारोबार का मूलभूत आधार है. क्योंकि बकरी को दूध व मांस दोनों के लिए पाला जाता है. उच्च गुणवत्ता के राशन व प्रबन्धन से मांस उत्पादन बढ़ता है लेकिन दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए आनुवांशिक सुधार की जरूरत पड़ती है. 20वीं पशुगणना के अनुसार औरैया में 20 हजार 918 और इटावा जिले में 16 हजार 197 बकरे बकरियों मौजूद हैं. जिनकी संख्या लगातार कम हो रही हैं. इसलिए भारतवर्ष की महत्वपूर्ण स्थानीय नस्ल को संरक्षित करने के उद्देश्य से केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम फरह, मथुरा के मार्गदर्शन का इस्तेमाल करते हुए जनपद इटावा में पूर्व से संचालित भदावरी भैस एवं जमुनापारी प्रक्षेत्र में ओपन न्यूक्लियर ब्रीडिंग फार्म चलाया जाना प्रस्तावित है.

बकरी पालकों के पास नहीं होता है कोई रिकॉर्ड
ओपन न्यूक्लियस प्रजनन प्रणाली का मेन मकसद बहु अंडाणु और भ्रूण ट्रांसप्लांट का प्रयोग करते हुए नर और मादा के एक विशिष्ट झुंड को बनाना तथा झुंडों में गहन चयन और परीक्षण करना है. इसके लिए नर और मादा का कम उम्र में चयन किया जाता है. ओपन न्यूक्लियस ब्रीडिंग केन्द्र के विकास के लिए यह बेहद ही जरूरी है कि अच्छी नस्ल के नर व मादा दोनों पाली जायें. उच्च गुणवत्ता के नर एवं मादा का चयन एक मुश्किल प्रक्रिया है. क्योंकि बकरी पालकों के पास इनके मांस, दूध उत्पादन एवं चारे-दाने से संबंधित कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं होता है. इसलिए उच्च गुणवत्ता के नर और मादा के चयन के लिए वैज्ञानिकों का लगातार सह‌योग जरूरी है. साथ ही ज्यादा संख्या में उच्च गुणवत्ता के नर और मादा को हासिल करने के लिए मेलों का आयोजन भी किया जाना आवश्यक है.

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प्रतीकात्मक फोटो:

यहां न्यूक्लियस सेंटर बनाया जाएगा
जमुनापारी नस्ल की बकरियों सबसे ज्यादा वजन और दूध उत्पादन में भारत 32 स्थानीय नस्लों में प्रथम स्थान रखती हैं. जमुनापारी नस्ल उत्तर प्रदेश में मूलरूप से यमुना, चम्बल और क्यारी नदियों के किनारे पायी जाती है. इस बकरी की मूल उपलब्धता जमुना के किनारे बीहड़ क्षेत्र में जनपद औरैया, इटावा में है. इटावा जिले के कई गांवों में शुद्ध नस्ल की जमुनापारी बकरियों वर्तमान में पाली जा रही हैं. नजदीकी जनपदों यथा-मैनपुरी, आगरा, औरैया, फिरोजाबाद, कन्नौज, फर्रुखाबाद एवं कानपुर देहात में भी जमुनापारी बकरी के पालन के प्रति रुझान बढ़ा है. इसलिए इटावा जिले में इन बकरियों की ब्रीडिंग का ओपन न्यूक्लियस केन्द्र बनाया जाना उपयुक्त होगा.

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