Home पोल्ट्री Poultry Farming: इन दो किसानों ने पोल्ट्री सेक्टर में गाड़ दिये हैं कामयाबी के झंडे, इस दिन मिलेगा सीएम आवार्ड
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Poultry Farming: इन दो किसानों ने पोल्ट्री सेक्टर में गाड़ दिये हैं कामयाबी के झंडे, इस दिन मिलेगा सीएम आवार्ड

बीमार मुर्गी का वजन कम हो जाता है और हर समय उदास रहती है.
चूजों की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग सेक्टर से जुड़कर अब बहुत से लोग लाखों कमा रहे हैं. पोल्ट्री फार्मिंग एक ऐसा बिजनेस है, जिसमें बहुत कम लागत लगती है और फायदा ज्यादा होता है. खासतौर पर ग्रामीण इलाके में रहने वाले लोग तो इसे एक तरह से फ्री में भी कर सकते हैं. जिसे बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग कहा जाता है. जिसमें मुर्गियां घरों के किचेन से निकले वेस्ट को और कीट को खाकर अपना पेट भर लेती हैं और प्रोटीन से भरपूर अंडों और मीट का प्रोडक्शन करती हैं, जो पूरी तरह से नेचुरल होता है.

ऐसे कई लोग हैं जो पोल्ट्री सेक्टर में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. जिसके चलते न सिर्फ खुद कमाई कर रहे हैं, बल्कि दूसरों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं. ऐसे ही दो पोल्ट्री कारोबारियों को गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, लुधियाना 13 सितंबर 2024 को होने वाले पशु पालन मेले में सीएम आवार्ड से नवाजने जा रहा है. इस संबंध में विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. प्रकाश सिंह बराड़ ने कहा कि पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय अपने विस्तार और आउटरीच कार्यक्रमों को मजबूत करके राज्य में पशुधन क्षेत्र के विकास के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है. पशुपालकों की विभिन्न श्रेणियों को प्रेरित करने के लिए विश्वविद्यालय ने पशुपालन की विभिन्न श्रेणियों में मुख्यमंत्री पुरस्कार दिए जाते हैं. बताते चलें कि इन पुरस्कारों में नकद राशि के साथ एक पट्टिका, शॉल और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है.

साढ़े तीन लाख ब्रॉयलर होते हैं पैदा
वहीं पोल्ट्री फार्मिंग श्रेणी में, गुरदर्शन सिंह टिवाना पुत्र मलकीत सिंह, गांव चनारथल खुर्द, जिला फतेहगढ़ साहिब को पुरस्कार मिलेगा. उन्होंने 2004 में ब्रॉयलर पालन शुरू किया और 2017 में पर्यावरण नियंत्रित, सुरंग हवादार शेड स्थापित किए. अब वह प्रति बैच 60,000 ब्रॉयलर पालते हैं (प्रति वर्ष 6 बैच) जिससे प्रति वर्ष 3,50,000 से अधिक ब्रॉयलर पैदा होते हैं. वह फ़ीड रूपांतरण अनुपात में सुधार करने के लिए टुकड़ों के रूप में पक्षियों की उम्र के अनुसार अपने फ़ीड को अनुकूलित करवाते हैं. उनके पास खेत में एक आटोमेटिक फीड और पानी देने वाली मशीन है. वह बीमारियों से मुर्गियों को बचाने के लिए प्रोटोकॉल के साथ बायो सिक्योरिरटी का ध्यान रखते हैं.

मार्डन प्रोसे​सिंग मशीन है इनके पास
वहीं पशुधन उत्पादन के (Value Addition) की श्रेणी में, कुलजस राय अरोड़ा पुत्र मोहन लाल, गांव वडाला विराम, तहसील मजीठा, जिला अमृतसर को पुरस्कार मिलेगा. उन्होंने 1975 में 1000 पक्षियों वाले लेयर फार्म से शुरुआत की, 1992 में ब्रॉयलर फार्मिंग में स्थानांतरित हो गए और ब्रॉयलर पक्षियों की क्षमता को बढ़ाकर 30,000 प्रति बैच कर दिया. 2010 में, उन्होंने अपने खुद के मूल स्टॉक के साथ हैचरी व्यवसाय में कदम रखा और हर महीने 500,000 पक्षी पैदा किए. 2017 में उन्होंने गियर बदल दिया और अपने ब्रांड ‘राय चिकन’ के तहत एक हाई तकनीक प्रोसेसिंग इकाई की स्थापना की. मौजूदा वक्त में वो अल्ट्रा मार्डन प्रोसेसिंग इकाई में 245 कर्मचारियों की मदद से हर महीने 618 टन तैयार मांस और 49 टन तैयार खाने के उत्पाद (सॉसेज, नगेट्स, सीक कबाब आदि) को बेच रहे हैं.

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