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Fish Farming: मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार करती है इन दो तरह से मदद

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मछलियों की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. सरकार फिशिंग फार्मिंग में ब्लू रिवॉल्यूशन यानी की नीली क्रांति के लिए प्रोत्साहित कर रही है और फिशिंग फार्मिंग को बढ़ावा दे रही है. सरकार की कोशिश है कि आधुनिक तरीके से फिशिंग फार्मिंग करके मछली पलक फायदा उठाएं और उनकी आय में इजाफा हो. इसको लेकर फिशिंग फार्मिंग छोटे पैमाने पर टैंक में भी किया जा सकता है, जिसको लेकर सरकार जागरूक करती है और इतना ही नहीं सरकार की ओर से मछली पालन करने के लिए ट्रेनिंग भी दी जाती है और लोन भी.

मछली पालन के लिए मिलती है ट्रेनिंग
भारत सरकार के मध्य विभाग में समय.समय पर ट्रेनिंग की सुविधा उपलब्ध रहती है. पशुपालन विभाग डेयरी विभाग और मत्स्य पालन यह तीनों कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं. सरकार रोजगार के लिए किसानों की आय बढ़ाने और बेरोजगारों को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाएं भी लॉन्च करती है. हरियाणा सरकार के द्वारा भी मत्स्य के लिए कई ट्रेनिंग कैंप लगाए जाते हैं. 10 दिन से लेकर 15 दिन की ट्रेनिंग में मछली पालन से लेकर, तालाब की सफाई और किस तरह का बीज डाला जाए, इन सब के बारे में फार्मरों को जानकारी दी जाती है. जिसके लिए किसान आनलाइन भी जानकारी हासिल कर सकते हैं.

कैसे मिलेगा लोन
वहीं सरकार मछली पालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए लोन भी देती है. कम ब्याज दरों में लोन स्थानीय बैंकों द्वारा उपलब्ध कराया जाता है. मछली पालन के लिए किराए वाला या खुद का टैंक किसान लगवा सकते हैं. मछली पालन करने के लिए कुल लागत 75 फीसदी सरकार द्वारा दिया जाता है. जिससे आसान किस्तों में आसानी से भरा जा सकता है. मछली पालन के लिए लोन पाने के लिए कमर्शियल एक्वावाकल्चर सिस्टम से मछली पालन करना चाहते हो तो 20 लख रुपए तक का लोन मिलेगा. लोन जिला मत्स्य विभाग से हासिल किया जा सकता है. आपको मत्स्य पालन के साथ 5 लाख रुपये अपनी तरफ से इन्वेस्ट करना होगा. टैंक में मछली पालन करने के लिए छोटा लोन भी दिया जाता है और इसे मत्स्य पालन विभाग उपलब्ध कराता है.

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