नई दिल्ली. पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई सरकारें अलग—अलग योजनाएं संचालित कर रही हैं. ताकि पशुपालन को बढ़ावा देने के साथ किसानों की इनकम को भी बढ़ाया जा सके. इससे किसान आत्मनिर्भर बन जाएंगे और उनके पास एक और काम का जरिया बन जाएगा. अगर कृषि में नुकसान होता है तो पशुपालन के जरिए किसान अपने नुकसान की भरपाई भी कर सकेंगे. यही वजह है कि सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए लोन और सब्सिडी देने की योजनाएं चला रही है. ताकि आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को भी इस काम को करने में दिक्कत न आए.
वहीं राजस्थान की सरकार प्रदेश में पशु चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के लिए लगातार कोशिश में जुटी है. राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी जिलों की सभी ग्राम पंचायतों में विभागीय पशु चिकित्सा संस्था उपलब्ध हो ताकि स्थानीय पशुपालकों को उनके नजदीक ही पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकें.
राजस्थान में हुए ये बड़े काम
इसी प्रयास के क्रम में 25 प्रथम श्रेणी पशु अस्पतालों को बहु उद्देशीय पशु चिकित्सालय में, 51 पशु चिकित्सालयों को प्रथम श्रेणी पशु अस्पतालों में तथा 101 पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों को पशु अस्पतालों में क्रमोन्नत किया गया है. साथ ही दो नवीन पशु चिकित्सालयों और 500 नवीन पशु चिकित्सा उपकेन्द्र खोले जाने को भी मंजूरी दी गई है. साथ ही इन संस्थानों के लिए कुल 1637 नए पद भी स्वीकृत किए गए हैं. इसके अलावा वर्ष 2019 से रुके हुए भर्ती प्रक्रिया पूरी करके 726 पशु चिकित्साधिकारियों को नियमित नियुक्ति दी गई है. प्रथम चरण में 2000 पशु सखियों को ए-हेल्प वर्कर के रूप में स्थापित किये जाने के लिए जिलेवार प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं. पशुधन परिचर परीक्षा का पाठयक्रम जारी कर 5934 पदों पर भर्ती परीक्षा आयोजित की जा चुकी है. साथ ही पशुधन सहायक के 2540 पदों पर भर्ती हेतु कर्मचारी चयन बोर्ड को अर्थना भिजवायी जा चुकी है.
मुफ्त दवाएं भी कराई जा रही हैं उपलब्ध
वहीं राज्य में राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजनान्तर्गत उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत अधिकतम 50.00 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है. पशुओं और पशुपालकों के हित में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किए जा रहे विशेष प्रयासों तथा पशुधन की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए फ्री दवा योजना, उपकेन्द्रों के साथ दवाओं की संख्या में बढ़ोतरी, देशी पशुधन की नस्लों में सुधार, पशुधन चिकित्सा और स्वास्थ्य के लिए शिक्षण संस्थानों की स्थापना जैसे नियमित कार्यों से निश्चय ही प्रदेश में पशुधन विकास को नई दिशा मिल सकेगी.












