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Livestock: पशुओं को इन बीमारियों से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर हुआ वैक्सीनेश, करोड़ों को मिला फायदा

पशु को पानी से भरे गड्ढे में रखना चाहिए या पूरे शरीर को ठंडा पानी का छिड़काव करते रहना चाहिए. शरीर के तापमान को कम करने वाली औषधि का प्रयोग भी कर सकते हैं.
पानी में खड़ी भैंसों की तस्वीर.

नई दिल्ली. पशुपालन किसानों के लिए एक फायदेमंद काम है जो उनकी आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि को भी मजबूत बनाता है. इसी वजह से भारत सरकार की ओर से कई योजनाएं पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही हैं. जिसमें सब्सिडी देना, ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाना और लोन देना भी शामिल है. वहीं पशुपालन के काम में बीमारियां सबसे बड़ी खलनायक होती हैं. क्योंकि इससे न सिर्फ उत्पादकता कम होती है, बल्कि पशुओं की मौत हो जाने से पशुपालकों को नुकसान भी होता है. इस वजह से सरकारें कई योजनाएं चलाकर इस समस्या को खत्म करना चाहती हैं.

सरकार की ओर से पशुओं की बीमारियों को दूर करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. जिससे पशुपालन करने वालो किसानों को इसका फायदा मिल सके. आइए जानते हैं इस बारे में डिटेल से.

जानें क्या-क्या काम हुए
साल 2019 से 6 राउंड में मवेशियों और भैंसों के लिए 108 करोड़ टीकाकरण हो चुके हैं, जिसका फायदा 7.37 करोड़ किसानों को मिला है.

मवेशियों और भैंसों में FMD प्रकोप 2018 में 227 से घटकर सितंबर 2024 तक 41 हो गए हैं, जिसमें बीमारी की गंभीरता कम हुई है.

प्रकोप की रिपोर्टिंग में भी बढ़ी है, जागरूकता के साथ सुधार हुआ है. FMD सीरो-मॉनिटरिंग डेटा टीकाकरण राउंड के बाद जानवरों में एंटीबॉडी का स्तर बढ़ा है.

एफएमडी टीकाकरण के राउंड 1 और 2 पर 2020 और 2021 में कोविड का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और राउंड 3 2022-23 में लंपी स्किन रोग के प्रकोप के कारण धीमा हो गया.

2023-24 में, टीकाकरण बढ़ा और सभी राज्यों और संघीय प्रदेशों में राउंड 4 पूरा हुआ, राउंड 5 13 राज्यों में पूरा हुआ और राउंड 6 हरियाणा, कर्नाटक और तमिलनाडु में शुरू हो गया.

राउंड 3 के बाद यानी 6 महीने के अंतराल के बाद टीकाकरण नियमित हो गया है और यह अभियान मोड में है.

झुंड प्रतिरोधकता का विकास टीकाकरण के बाद के नमूनों के सीरो निगरानी द्वारा मापा जाता है. राउंड 4 के बाद, सुरक्षात्मक एंटीबॉडी स्तर क्रमशः 82.26%, 76.68% और 78.69% जानवरों में सीरोटाइप O, A और एशिया 1 के लिए पाया गया.

पहले चरा में फुट और माउथ रोग मुक्त क्षेत्रों के काम शुरू हो गया है. जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे 9 राज्यों को शामिल किया गया है.

एफएमडी रोग के नियंत्रण के लिए देश में, 2030 तक एफएमडी को समाप्त करने के लिए सभी गायों, भैंसों (भेड़, बकरियों और सूअरों के चयनित क्षेत्रों में) में 4 से 6 और बार टीकाकरण की आवश्यकता होगी.

टीके की आपूर्ति में सुधार के साथ, जुलाई 2024 में प्रवासी जनसंख्या वाले राज्यों में भेड़ और बकरियों का टीकाकरण शुरू किया गया है.

ब्रुसेलोसिस टीकाकरण: 2020 से, 35 राज्यों/संक्षिप्तियों को 5.43 करोड़ ब्रुसेला वैक्सीन दी गई है और 4.29 करोड़ मादा बथेरों का टीकाकरण किया गया है और प्रकोपों में कमी आई है.

Written by
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