Home पशुपालन Goat Farming: युवान एग्रो फार्म में बकरों का डीएनए समेत होता है ये तीन टेस्ट, सेफ रखते हैं हर रिकॉर्ड
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Goat Farming: युवान एग्रो फार्म में बकरों का डीएनए समेत होता है ये तीन टेस्ट, सेफ रखते हैं हर रिकॉर्ड

युवान गोट फार्म-

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में आगरा के फतेहाबाद स्थित युवान एग्रो फार्म एक ऐसा गोट फार्म है, जो अपने यहां पाले जा रहे जानवरों का कई स्तर पर रिकॉर्ड रखता है. जिसका फायदा भी उन्हें मिल रहा है. यहां पर पाले जा रहे जानवरों को दी जा रही दवाओं से लेकर वैक्सीन तक का रिकॉर्ड रखा जाता है. वहीं इस फार्म में पाले जा रहे बकरों को तीन अलग-अलग तरह की जांचों से भी गुजरना पड़ता है. ताकि उनमें अगर कोई कमी हो तो उनकी एंट्री फार्म में न की जाए या फिर पहले से हैं तो उन्हें हटा दिया जाए. इससे नुकसान का खतरा कम हो जाता है.

युवान एग्रो फार्म के संचालक डीके सिंह ने बताया कि पशुओं का रिकॉर्ड रखना कई मायनों में जरूरी और फायदेमंद होता है. जैसे कि पशुओं की स्वास्थ्य स्थिति, वैक्सीनेशन, ब्रीडिंग और प्रोडक्शन पर नजर बनाए रखने में इससे मदद मिलती है. पशुओं का रिकॉर्ड रखने से ये भी फायदा होता है कि पशुओं की स्वास्थ्य स्थिति, बीमारियों और उपचारों का पता आसानी से लगाया जा सकता है. जिससे बीमारियों को जल्दी पहचाना और उनका इलाज किया जा सकता है.

इस तरह का रिकार्ड करते हैं सेफ
युवान एग्रो फार्म के उद्घाटन के मौके पर कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा था कि कुत्तों का रिकार्ड तो रखा जाता है लेकिन फायदा पहुंचाने वाले जानवर जैसे गाय-भैंस, भेड़ और बकरी का नहीं. वहीं दूसरी ओर युवान एग्रो फार्म अपने यहां पाले जा जानवरों का रिकार्ड रखता है. डीके सिंह ने कहा कि हमारे यहां पाले जा रहे 5 हजार जानवरों का डाटा है. फार्म में जो भी जानवर पाले जा रहे हैं उन्हें एक नंबर दिया जाता है. हम उन्हें जो भी दवा देते हैं, उसका भी रिकॉर्ड रखते हैं. खासतौर पर ब्रीडिंग सेटअप में मेल और फीमेल का रिकॉर्ड रखा जाता है. साथ ही किन बकरियां ने कितने बच्चों को जन्म दिया उनका भी रिकॉर्ड हम रखते हैं और उनकी मां और बाप का भी रिकॉर्ड रखा जाता है.

रिकार्ड रखने के फायदे गिनाए
डीके सिंह ने बताया कि युवान गोट फार्म जो भी ब्रीडर्स हैं, उनका हम पहले डीएनए टेस्ट करवाते हैं. फिर स्पर्म टेस्ट करवाते हैं. इसके अलावा ब्लड टेस्ट कराते हैं. जब सारी चीज अच्छी होती है, जिससे बकरी पालन में मुनाफा मिलता है तब ही उन बकरों को यहां पाला जाता है. इसके बाद ही किसानों को भी दिया जाता है. उन्होंने बताया कि हर तरह का डाटा रखते हैं. जो बेहद जरूरी भी है. अगर डाटा नहीं होगा तो बकरी पालन में लॉन्ग टर्म में बड़ी दिक्कत आती है. हम बकरे-बकरियों को जो भी दवा देते हैं, जब उनका रिकार्ड रखेंगे और दोबार वही स्थिति आई तो पर हमें पता होता है कि अब क्या करना है. जब एनिमल को कोई दिक्कत आती है तो सस्टेनेबल मॉडल के तहत उस जानवर का उपचार अच्छे ढंग से कर सकते हैं. मान लीजिए कि किसी जानवर पर दवा पर ज्यादा खर्च आ रहा है तो उस जानवर को हम बाहर कर देते हें.

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