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Goat Farming: बकरे की ​बढ़िया ग्रोथ और अच्छे मीट के लिए कब करवाना चाहिए बधियाकरण, जानें यहां

तोतापरी की बकरी के पालन में बहुत ही कम लागत आती है. तोतापुरी या तोतापरी बकरी कम लागत में पालकर मोटी कमाई की जा सकती है.
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली. बकरी को खसी करने का मतलब उसका बधियाकरण करना है. इसमें बकरे के अंडकोषों को हटा दिया जाता है, जिसके चलते उसका हार्मोनल विकास नहीं होता है. इसके नतीजे में बकरा आक्रामक नहीं होता और खसी में तब्दील होने के बाद उसका तेजी के साथ विकास होता है. बकरे का वजन बढ़ता है और उसका दाम भी अच्छा मिलता है. जबकि मीट उत्पादन करने के लिए बकरे का बधियाकरण करना बेहद ही जरूरी माना जाता है. इससे बकरी का मांस ज्यादा मुलायम और स्वादिष्ट भी हो जाता है. जिससे दाम अच्छा मिलता है.

केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG) के मुताबिक बकरे का बधियाकरण करने का भी सही समय होता है. बहुत से लोग 10 से 15 दिन पर कुछ लोग दो से तीन महीने पर और कुछ लोग उसके बाद करते हैं लेकिन बढ़िया ग्रोथ और मीट उत्पादन करने के लिए इसका सही वक्त चुनना बेहद जरूरी है, तभी फायदा मिलेगा.

जानें सही समय क्या है
एक्सपर्ट का कहना है कि जब बकरे का जन्म हो उसके चार से आठ हफ्ते के बाद उसे खसी के तौर पर तब्दील कर देना चाहिए.

एक्सपर्ट का कहना है कि चार हफ्ते से लेकर 8 हफ्ते के बीच में अगर आप खसी करते हैं तो बढ़िया ग्रोथ मिलेगी. इससे बकरा पालन के काम में आपको फायदा मिलेगा.

मान लीजिए अगर आप 10 से 15 दिन के अंदर बधियाकरण करते हैं तो बकरे की ग्रोथ अचछी होगी तो उससे चर्बी बनेगी और इससे उसका यूरिन रुक सकता है.

हालांकि चार से आठ हफ्ते के बीच में भी बधियाकरण करने पर इसी तरह का खतरा रहता है लेकिन आप एक्सपर्ट से पूछकर उसकी डाइट दीजिएगा तो इस तरह की समस्या नहीं होगी. जकि बकरे की ग्रोथ अच्छी होने की गारंटी है.

निष्कर्ष
एक्सपर्ट का कहना है कि जो बकरी पलक भाई मीट उत्पादन के लिए बकरों को पालते हैं उन्हें इस तरीके को जरूर अपनाना चाहिए. इससे हर तरह से में फायदा ही फायदा मिलता है.

Written by
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