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Fisheries: देश में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के इंटीग्रेटेड विकास लिए प्लान तैयार

‘Need national guideline on eco-labeling of marine fishery resources’
Symbolic photo. livestock animal news

नई दिल्ली. सरकार ने संघ बजट 2026-27 में देश के 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के समेकित विकास के माध्यम से मत्स्य पालन और जलीय कृषि के विकास की घोषणा की है. इस संबंध में, सरकार के मत्स्य विभाग ने राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय करके 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के समेकित विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की है. इसके अलावा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत विभिन्न राज्यों में 23 जलाशयों के समेकित विकास को स्वीकृति दी गई है और इसकी प्रगति की नियमित रूप से सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा निगरानी की जा रही है.

क्षेत्र की संभावनाओं को अधिकतम करने तथा मत्स्य पालन और जलीय कृषि के समग्र विकास के लिए, मत्स्य विभाग (डीओएफ), मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने देशभर के सभी राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों में 34 समूह अधिसूचित किए हैं, जिनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में टूना समूह भी शामिल है.

महत्वपूर्ण कमियों को किया जा रहा है दूर
यह पहल प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत की गई है, जिसका उद्देश्य बाजार नेटवर्क के एकीकरण, जलीय कृषि अवसंरचना के उन्नयन तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से महत्वपूर्ण कमियों को दूर करना है.

विभाग हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है और इन सभी क्लस्टरों के विकास के लिए समय-समय पर उनकी प्रगति की समीक्षा की जा रही है.

विदेश मंत्रालय ने 4 नवम्बर, 2025 को प्रादेशिक जल, महाद्वीपीय शेल्फ, विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजैड) और अन्य समुद्री क्षेत्र कानून, 1976 के तहत विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजैड) में मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन नियम, 2025 अधिसूचित किए हैं.

इसके अतिरिक्त, विदेश मंत्रालय ने मत्स्य विभाग के परामर्श से 9 दिसम्बर, 2025 को भारतीय ध्वज वाली मत्स्य नौकाओं द्वारा उच्च समुद्र में मत्स्य संसाधनों के निरंतर दोहन के लिए दिशानिर्देश, 2025 भी अधिसूचित किए हैं.

यह अधिसूचना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 73 की उपधारा (1) के खंड (ख) तथा सातवीं अनुसूची की सूची-I की प्रविष्टि 57 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए जारी की गई है.

इन नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार, ईईजैड या उच्च समुद्र में पकड़ी गई मछलियां, यदि भारतीय बंदरगाहों पर उतारी जाती हैं, तो उन्हें भारतीय मूल की माना जाएगा और उन पर आयात शुल्क नहीं लगेगा, जिससे मछुआरों को अधिक लाभ प्राप्त होगा.

दिशानिर्देशों में मदर-चाइल्ड पोत मॉडल के माध्यम से मध्य-समुद्र ट्रांसशिपमेंट की सुविधा भी प्रदान की गई है। इसके अलावा, इन नियमों और दिशानिर्देशों में यह भी प्रावधान है कि विदेशी बंदरगाहों पर उतारी गई मछलियों को निर्यात माना जाएगा.

साथ ही, आरईएएलसीराफ्ट पोर्टल से जुड़कर एमपीईडीए कैच प्रमाणपत्र और ईआईसी स्वास्थ्य प्रमाणपत्र का ऑनलाइन निर्गमन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे पूर्ण ट्रेसबिलिटी, वैश्विक मानकों का अनुपालन और विदेशी बाजारों में भारतीय समुद्री उत्पादों के लिए उच्च मूल्य सुनिश्चित होगा.

इसके अतिरिक्त, केन्‍द्रीय बजट 2026-27 की घोषणा के अनुसार, भारतीय मत्स्य नौकाओं द्वारा विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजैड) या उच्च समुद्र में पकड़ी गई मछलियां आयात शुल्क से मुक्त होंगी और ऐसी मछलियों को विदेशी बंदरगाहों पर उतारना वस्तुओं के निर्यात के रूप में माना जाएगा.

Written by
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