नई दिल्ली. राष्ट्रीय कोल्ड वॉटर मछली उत्पादन आज अगर 7 हजार मीट्रिक टन पहुंच गया है और अकेले सिर्फ ट्राउट उत्पादन पिछले दशक की तुलना में लगभग 1.8 गुना बढ़कर 2024–25 में लगभग 6 हजार टन हो गया है तो इसमें सरकारी प्रयासों का भी अहम रोल है. बताते चलें कि इसमें भारत सरकार ने प्रमुख योजनाओं और टारगेट पहलों के माध्यम से कोल्ड-वॉटर फिशरीज के बुनियादी ढांचे में पर्याप्त निवेश किया है. जिसका फायदा बढ़े हुए उत्पादन के रूप में मिला है और मछली किसानों की इनकम भी इससे बढ़ी है.
बात करें अगरर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) की तो इसके तहत वर्ष 2020-26 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर 21 हजार 963.48 करोड़ मूल्य की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें विशेष रूप से कोल्ड वॉटर वाले राज्यों के लिए 5 हजार 638.76 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया. इन निवेशों में 5 हजार 663 रेसवे, 54 ट्राउट हैचरी, 13 बड़ी आरएएस इकाइयां, 16 मध्यम आरएएस इकाइयां, 36 छोटी आरएएस इकाइयां, हिमालयी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में लगभग 4 हजार 600 तालाब, 293 कोल्ड स्टोरेज और 8 हजार 366 परिवहन वाहन शामिल हैं.
कहां कितना हुआ निवेश
राज्य-वार निवेशों में उत्तराखंड के लिए 317.25 करोड़, हिमाचल प्रदेश के लिए 155.48 करोड़ दिए गए.
जम्मू और कश्मीर के लिए 149.73 करोड़ और लद्दाख में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए 33.49 करोड़ सरकारी मदद के तौर पर दिए गए.
ये परियोजनाएं रेसवे, ट्राउट हैचरी, बायोफ्लॉक सिस्टम, मछली दाना (फीड) मिलों, मछली कियोस्क, सजावटी मत्स्यपालन इकाइयों, रेफ्रिजरेटेड ट्रांसपोर्ट और जलाशय भंडारण कार्यक्रमों का समर्थन करती हैं.
मत्स्यपालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) ने हैचरी, प्रशिक्षण केंद्रों और मत्स्यपालन बुनियादी ढांचे के लिए 2018-26 के दौरान 7,761.78 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी थी.
नीली क्रांति योजना (2015-20) ने रेसवे, हैचरी और जलाशय भंडारण के समर्थन के माध्यम से वैज्ञानिक ट्राउट खेती की नींव रखी.
6 हजार करोड़ रुपए के भारी भरकम बजट वाली पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत, जलीय कृषि बीमा, मत्स्यपालन स्टार्टअप, सूक्ष्म उद्यमों को प्रदर्शन अनुदान और मूल्य श्रृंखला दक्षता के लिए सहायता प्रदान की जा रही है. जिससे कोल्ड वॉटर के मछली पालकों को सीधा लाभ मिल रहा है.
अनंतनाग (केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर), उधम सिंह नगर (उत्तराखंड), जीरो (अरुणाचल प्रदेश) और मोकोकचुंग (नागालैंड) में स्थापित एकीकृत एक्वा पार्क आधुनिक मत्स्यपालन केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं.
जो हैचरी, प्रसंस्करण सुविधाओं, कोल्ड चेन प्रणालियों, मूल्य संवर्धन बुनियादी ढांचे और विपणन सहायता से लैस हैं.
अनंतनाग (जम्मू-कश्मीर), पिथौरागढ़ (उत्तराखंड), कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) और कारगिल (केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख) में चार कोल्ड-वॉटर फिशरीज क्लस्टर भी अधिसूचित किए गए हैं.










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