नई दिल्ली. केन्द्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (CARI) बरेली के दो प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों डॉ. जयदीप रोकड़े और डॉ. संदीप सरन ने वैश्विक मंच पर भारत का नाम रोशन करते हुए विश्व कुक्कुट विज्ञान संघ (WPSA) के प्रतिष्ठित ‘एजुकेशन अवार्ड 2026’ को प्राप्त किया है. यह ऐतिहासिक उपलब्धि कनाडा के टोरंटो में आयोजित 27वीं वर्ल्ड पोल्ट्री कांग्रेस के दौरान प्रदान की गई. जिसमें उन्हें 15 हजार अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि तथा प्रशस्ति-पत्र से सम्मानित किया गया. इस गौरवपूर्ण क्षण के साथ ही डॉ. जयदीप रोकड़े व डॉ संदीप सरन, भारत ही नहीं, पूरे एशिया महाद्वीप में इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले प्रथम वैज्ञानिक बन गए हैं.
साथ ही डॉ रोकडे, इस वैश्विक पुरस्कार को पाने वाले एशिया के पहले पशु चिकित्सक व WPSA के इतिहास में इस सम्मान को पाने वाले सबसे युवा वैज्ञानिक भी हैं. वहीं, डॉ. संदीप सरन को कुक्कुट शिक्षा, कृषि-व्यवसाय, उद्यमिता विकास, नीति-निर्माण और मानव संसाधन क्षमता निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया है.
पोल्ट्री शिक्षा को दी नई दिशा
इन दोनों वैज्ञानिकों ने अपने अभिनव डिजिटल लर्निंग मॉड्यूल, शोध एवं तकनीकी व्यावसायीकरण तथा ग्रामीण आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से पोल्ट्री शिक्षा को एक नई दिशा दी है.
जिससे हजारों विद्यार्थियों, किसानों, ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनने तथा उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रखने का अवसर मिला है.
संस्थान के निदेशक ने इस अभूतपूर्व सफलता पर अपनी हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “यह पुरस्कार केवल दो वैज्ञानिकों की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है.
बल्कि किसानों, छात्रों और ग्रामीण समुदायों के प्रति आईसीएआर-केन्द्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान की अटूट प्रतिबद्धता का मूर्त प्रमाण है.
विशेष रूप से, पिछले पाँच वर्षों में डॉ. रोकड़े और डॉ. सरन ने जिस समर्पण एवं कर्मठता से किसानों व विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य किया है.
उसी के फलस्वरूप आज विश्वस्तरीय यह मान्यता मिली है. इससे संपूर्ण वैज्ञानिक समुदाय का मनोबल बढ़ा है और हम सबको प्रेरणा मिलती है कि हमारे प्रयास सही दिशा में अग्रसर हैं.
यह सम्मान न केवल संस्थान के लिए गौरव का विषय है, बल्कि पूरे भारत तथा वैश्विक कुक्कुट विज्ञान समुदाय के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है.
निदेशक ने दोनों वैज्ञानिकों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय पहचान संस्थान की वैज्ञानिक उत्कृष्टता, सामाजिक समर्पण और भावी पीढ़ियों के प्रति दायित्व-बोध को पुष्ट करती है.
आईसीएआर-सीएआरआई सदैव इसी दृष्टि से कार्य करता रहेगा कि शोध एवं शिक्षा का लाभ देश के अंतिम पंक्ति के किसान तक पहुँचे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त हो सके.












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