नई दिल्ली. महिलाओं के रोजगार और आजीविका संबंधी आवश्यकताओं को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत ब्लू इकोनॉमी नीति ढांचे में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है. जिसमें आंध्र प्रदेश सहित तटीय क्षेत्रों की महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है. इस योजना में महिलाओं को प्राथमिकता वाले लाभार्थी समूह के रूप में मान्यता दी गई है तथा मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए अधिक वित्तीय सहायता और लक्षित पहल प्रदान की गई हैं.
महिला लाभार्थी लाभार्थी-उन्मुख गतिविधियों के लिए 60 फीसद तक सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त करने की पात्र हैं, जबकि सामान्य श्रेणी के लिए यह सहायता 40 परसेंट है. यह सुविधा व्यक्तिगत तथा समूह दोनों प्रकार की गतिविधियों पर लागू होती है, जिससे महिलाओं के लिए मत्स्य पालन से संबंधित उद्यमों हेतु वित्तीय सहायता प्राप्त करना अधिक आसान हो जाता है.
महिलाओं पर किया जा रहा है फोकस
आंध्र प्रदेश सरकार ने बताया है कि आंध्र प्रदेश फिशरमेन कोऑपरेटिव फेडरेशन (एएफसीओएफ) ने सहकारी समितियों को सुदृढ़ करने के लिए, विशेष रूप से महिला-नेतृत्व वाली सहकारी समितियों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है.
आंध्र प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों, जिनमें नेल्लोर भी शामिल है, में फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफएफपीओ) के गठन की एक रणनीतिक पहल शुरू की है.
इस पहल का उद्देश्य सामूहिक प्रयास और संस्थागत सहयोग के माध्यम से मत्स्य पालकों को सशक्त बनाना है.
साथ ही एफएफपीओ को भारत सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) तथा प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) के अंतर्गत उपलब्ध वित्तीय सहायता, अवसंरचना, क्षमता निर्माण और अन्य लाभों तक पहुंच सुनिश्चित करना है.
मत्स्य पालन विभाग की नीतियां और योजनाएं, जिनमें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) भी शामिल है.
मछली उत्पादन, उत्पादकता और मूल्य श्रृंखला के आधुनिकीकरण की व्यापक रणनीति के तहत गहरे समुद्र में तथा यंत्रीकृत मत्स्य पालन को बढ़ावा देने को उच्च प्राथमिकता देती हैं.
पारंपरिक मत्स्य महिला श्रमिकों की आजीविका की सुरक्षा और उसे सुदृढ़ करने के लिए पीएमएमएसवाई के अंतर्गत लक्षित हस्तक्षेप किए गए हैं.
महिला लाभार्थी गहरे समुद्र में मत्स्य पालन करने वाले पोतों की खरीद सहित मत्स्य पालन से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के लिए 60 फीसद तक की वित्तीय सहायता प्राप्त करने की पात्र हैं, जबकि सामान्य श्रेणी के लिए यह सहायता 40 परसेंट है.
इसके अतिरिक्त, यह सब्सिडी मत्स्य महिलाओं को समुद्री शैवाल की खेती, सजावटी मत्स्य पालन, धान सह मछली पालन, केज कल्चर, मछली प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा विपणन जैसी आय-विविधीकरण गतिविधियों के लिए भी प्रदान की जाती है, जिससे उनकी आजीविका के विविधीकरण और लचीलेपन को बढ़ावा मिलता है.
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत मत्स्य पालन विभाग आंध्र प्रदेश सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मत्स्य सहकारी समितियों के गठन और उन्हें सुदृढ़ करने में सहायता प्रदान करता है.
आंध्र प्रदेश सरकार ने बताया है कि राज्य में 66 महिला मत्स्य श्रमिक सहकारी समितियों का पंजीकरण/रूपांतरण फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफएफपीओ) के रूप में किया गया है.
अब तक 10 एफएफपीओ को प्रबंधन लागत और इक्विटी अनुदान के रूप में कुल 69,11,452 रुपये जारी किए गए हैं, जिससे उन्हें कार्यालय अवसंरचना में सुधार, व्यवसाय विकास गतिविधियां संचालित करने तथा अपनी वित्तीय आधारशिला को मजबूत करने में सहायता मिली है.
नेल्लोर जिले में 6 महिला मत्स्य सहकारी समितियों को एफएफपीओ में परिवर्तित किया गया है तथा अब तक एक एफएफपीओ को एकमुश्त अनुदान के रूप में 90,000 रुपये स्वीकृत किए गए हैं.











Leave a comment