नई दिल्ली. लंपी स्किन डिजीज गाय-भैंस के लिए बड़ा खतरा है. वहीं ये बीमारी अन्य मवेशियों में भी पाई जाती है. इससे बुखार, त्वचा पर गांठें, दूध उत्पादन में कमी और कमजोरी आती है. असल में ये एक वायरल बीमारी है और सभी पशुओं को चपेट में ले लेती है. इस बीमारी बुखार 104-106°F तक हो जाता है. त्वचा पर गांठें पड़ जाती हैं. चिन नीइसे में सूजन आ जाती है और यहां तक कि दूध उत्पादन में कमी भी देखने को मिलती है. आँख से स्राव आना शुरू हो जाता है. पशु को भूख कम लगती है.
वहीं पशु उदास रहता है और कमजोरी महसूस करता है. गर्भित पशुओं में गर्भपात हो जाता है. गांठें व त्वचा पर पपड़ियों पड़ जाती हैं. एक्सपर्ट मुताबिक ये बीमारी मच्छर, मक्खी, टिक जैसे कीड़ों के काटने से से फैलती है. वहीं संक्रमित पशुओं के सीधे संपर्क में आने से, संक्रमित चारा, पानी, उपकरणों से, एक स्थान से दूसरे स्थान पर संक्रमित पशुओं की आवाजाही से और बार-बार परिवहन में लंबे समय रहने के कारण भी फैल जाती है.
नियंत्रण एवं रोकथाम कैसे करें
सभी पशुओं का LSD वैक्सीन से टीकाकरण करें.
सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करें.
नियमित रूप से कीड़ों को खत्म करने वाली दवा का छिड़काव करें.
बाड़ा और आसपास की सफाई रखें और नियमित कीटाणुनाशक से साफ करें.
बीमार पशुओं को तुरंत अलग रखें.
साफ पानी और संतुलित आहार उपलब्ध कराएं ताकि प्रतिरोधक क्षमता बढ़े.
पशुओं की आवाजाही और नए पशुओं को मिश्रण करने से बचें.
LSD का कोई विशेष इलाज नहीं है. यह सहायक उपचार से ठीक होती है.
बुखार के लिए एनालजेसिक पशु चिकित्सक की सलाह अनुसार दें.
द्वितीयक संक्रमण घाव के लिए एंटीबायोटिक दें.
विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट दें.
घावों की सफाई करें और एंटीसेप्टिक दवा लगाएं.
पशुपालकों को चाहिए कि बीमारी होने पर नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें.
स्वयं से कोई दवा न करें.
पशु चिकित्सक की सलाह और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करें.
टीकाकरण और बीमारी नियंत्रण में सहयोग करें.
साफ-सफाई और कीट नियंत्रण पर विशेष ध्यान दें.
गांठें (नोडइस) बढ़ रही हों तो पशु चिकित्सक से संपर्क करें.
आंख या नाक से अधिक स्राव हो तो भी डॉक्टर को बुलाएं
स्वस्थ पशुधन के लिए अपनाएं ये अच्छे उपाय
समय पर टीकाकरण करें.
स्वच्छ व ठंडा पानी दें.
पशु को स्वच्छ, सूखा व हवादार स्थान पर रखें.
संतुलित आहार व खनिज मिश्रण दें.
मच्छर व कीट नियंत्रण अपनाएं.











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