नई दिल्ली. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि ठंड के मौसम में अक्सर पशु के बच्चे यानी बछड़े को दस्त की शिकायत हो जाती है. ऐसा होने के चलते डिहाईड्रेशन, पशु के शरीर में पोषक तत्वों की कमी, कमजोर प्रतिरक्षा और यहां तक कि ग्रोथ में रुकावट भी हो जाती है. इतना ही नहीं मामला ज्यादा गंभीर हो जाने पर बछड़े की मौत भी हो सकती है. जिसके चलते पशुपालन के काम में पशुपालक भाई को नुकसान होता है. इसलिए इससे बचाव जरूरी है. ताकि बछड़ों से भी पशुपालन के काम में फायदा उठाकर कमाई की जा सके.
बिहार सरकार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) के एक्सपर्ट की मानें तो पशुओं को दस्त से बचाना बेहद ही जरूरी है. ऐसे में ये जानना भी बेहद जरूरी है कि दस्त होने के कारण क्या हैं. अगर कारण पता चल गया तो बछड़े को दस्त होने की समस्या से बचाया जा सकता है, तो आइए इस बारे में यहां डिटेल से जानते हैं.
कौन-कौन सी वजह है
एक्सपर्ट का कहना है कि कई बार गलत आहार की वजह से भी पशु के बछड़े में दस्त की शिकायत हो जाती है. खराब दूध अनियमित आहार देने पर बछड़े को दस्त हो सकता है और उसका पेट भी खराब हो सकता है.
ठंड के मौसम में ठंडी हवा या ठंडे फर्श पर बैठने की वजह से भी दस्त की समस्या पशुओं को हो सकती है. इसलिए बछड़ों का ठंड के मौसम में खास ख्याल रखना चाहिए. उन्हें ठंड से हर समय बचाने की कोशिश करना चाहिए.
संक्रमण या कीटाणु की वजह से भी पशु में दस्त की समस्या होती है. इस वजह से संक्रमण और कीटाणु से बचाना भी बेहद ही जरूरी होता है.
कई बार बच्चे को जन्म देने वाली भैंस या गए ज्यादा दूध का उत्पादन नहीं कर पाती है. पशु के बछड़े को दूध न मिल पाने की वजह से भी दस्त की समस्या हो सकती है.
वहीं कुछ मामलों में बछड़ा खुद दूध भी ज्यादा नहीं पी पाता है. इस वजह से भी ये समस्या होती है. उन्हें कमजोरी हो जाती है. जिसके चलते दस्त की समस्या हो जाती है.
निष्कर्ष
यदि आप बछड़ों के साथ होने वाली इन समस्याओं को रोक सकते हैं तो दस्त होने की समस्या से उन्हें बचाया जा सकता है. जिससे आपको पशुपालन के काम में नुकसान भी नहीं होगा.












