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Milk Production: उन्नत नस्ल के पशुओं को खुद तैयार करेगा मध्य प्रदेश, पशुपालकों का बढ़ेगा मुनाफा

murrah buffalo livestock
प्रतीकात्मक फोटो:

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश सरकार राज्य में दूध उत्पादन बढ़ाना चाहती है. इसी कड़ी में एक अहम फैसला सरकार की ओर से लिया गया है. पशुओं की उन्नत नस्ल अब मध्य प्रदेश में ही तैयार की जाएगी. जिसका फायदा पशुपालकों को मिलेगा. पशुपालकों को ऐसे मवेशियों को लाने के लिए गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान नहीं दौड़ना पड़ेगा. डेयरी-पशुपालन विभाग देश का पहला ब्रीड एसोसिएशन भोपाल में ही बनाएगा. यहां हरियाणा की साहीवाल व गुजरात की गिर व अन्य पशुओं की उन्नत नस्लें तैयार की जाएंगी. इस बात की जानकारी डेयरी एवं पशुपालन विभाग उमाकांत उमराव ने दी है.

उन्होंने बताया कि ब्रीड एसोसिएशन पशु की नस्ल की पहचान के बाद जर्म प्लाज्म तैयार करेगा. यह पशु की वह जीन है, जिससे उसकी नस्ल, गुण और उत्पादन क्षमता आगे की पीढ़ियों में जाती है. इसमें वीर्य, भ्रूण और अंडाणु होते हैं. इसके बाद उन्नत नस्लें तैयार की जाएंगी. पशुपालकों को अच्छी नस्लें अभी दूसरे राज्यों से लानी पड़ती है. अब उन्हें इस परेशानी से छुटकारा मिल जाएगा.

बढ़ जाता है खर्च
उन्होंने कहा कि पशुओं को दूसरे राज्य से लाने पर काफी खर्च और परेशानी होती है. इसलिए प्रदेश में ही अच्छी नस्लों का बाजार विकसित करने के लिए ब्रीड एसोसिएशन तैयार किया जा रहा है.

ब्रीड एसोसिएशन का जिला स्तर पर नामांकन शुरू हो गया है. एसोसिएशन में पशुपालक, डॉक्टर, विभागीय एक्सपर्ट, केंद्र की संस्थाओं समेत नस्लों पर काम करने वाली सामाजिक संस्थाओं को रखा गया है.

बताया गया कि इसमें अभी उन्हीं पशुपालकों को रखा जाएगा, जिनके पास एक नस्ल के 20 पशु हैं.

मध्य प्रदेश में हरियाणा से ज्यादा दूध देने की क्षमता रखने वाली साहिवाल गाय और मुर्रा भैंस लाई जाती है.

गुजरात से गिर और जाफराबादी भैंस को इंपोर्ट किया जाता है.

उत्तर प्रदेश से भदावरी भैंस और कुछ डेयरी नस्ल वाले पशु लाए जाते हैं. उच्च बटरफैट के लिए इन्हें पसंद किया जाता है.

राजस्थान से थारपारकर गाय और भैंस समेत कुछ विशेष किस्म की नस्लें लाई जाती हैं.

निष्कर्ष
सरकार देश के कुल दूध उत्पादन में ​अपनी हिस्सेदारी 9 परसेंट से बढ़ाना चाहती है. सरकार इसे 20 फीसद तक ले जाना चाहती है. ताकि दूध उत्पादन के साथ-साथ किसानों की इनकम भी बढ़ जाए. इसलिए कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं. वहीं अब उन्नत नस्ल के पशुओं के लिए ये काम किया गया है. ताकि पशुपालकों को पशु सस्ती दरों पर उपलब्ध हो जाएं. इससे पशुपालकों को डेयरी फार्मिंग में मुनाफा बढ़ जाएगा.

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