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Dairy Business: 6 गाय से शुरू डेयरी बिजनेस में अमित ने छोड़ी अमिट छाप, पढ़ें सफलता की कहानी

गोवंश के लिए योगी सरकार ने समाज को भी इस अभियान का हिस्सा बनाते हुए कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रखी हैं.
चारा खाती एफएफ गाय.

नई दिल्ली. डेयरी फार्मिंग करके हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिला स्थित नरनौल के नांगल हरनाथ निवासी अमित यादव युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुके हैं. लगभग 10 वर्ष पहले मात्र 6 एचएफ गायों से शुरू हुई उनकी डेयरी आज उन्नत प्रबंधन और उत्कृष्ट प्रजनन के दम पर 50 उच्च नस्ल के पशुओं तक पहुंच चुकी है. शुरूआती दौर में भले ही उत्पादन भी कम था लेकिन अनुभव के बाद वैज्ञानिक प्रबंधन, धैर्य और अथक परिश्रम के चलते अमित ने अपनी डेयरी को लगातार आगे बढ़ाया है. खास बात है कि शुरूआती 6 गायों के बाद उन्होंने कभी बाजार से पशु नहीं खरीदे. उत्कृष्ट प्रजनन और पोषण प्रबंधन के जरिए उन्होंने अपनी डेयरी में ही उन्नत नस्ल के पशु तैयार किए, जिससे आज प्रति पशु औसत दूध उत्पादन 30-35 लीटर तक पहुंच गया है.

अमित बताते हैं कि पहले वे चारा पकाकर खिलाते थे, लेकिन पिछले 7-8 वर्षों से यह प्रक्रिया पूरी तरह बंद कर दी गई है. अब वे चारे को 7-8 घंटे भिगोकर संतुलित मिश्रण तैयार करते हैं, जो पाचन के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है. अधिकांश चारा वे स्वयं तैयार करते हैं और केवल आवश्यक सप्लीमेंट ही बाजार से लेते हैं. इससे उत्पादन बढ़ा है और चारा लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है.

300 लीटर दूध का उत्पादन हर दिन
डेयरी में राशन वैज्ञानिक आधार पर तय किया जाता है, जिसमें पशु की आवश्यकता, दूध उत्पादन और बॉडी कंडीशन जैसे मानकों का विशेष ध्यान रखा जाता है.

डेयरी से निकलने वाले गोबर का उपयोग अमित अपने खेतों में करते हैं, जिससे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हुई है और मिट्टी की उर्वरता में सुधार आया है.

इसका सीधा असर फसल उत्पादन पर भी दिखाई दे रहा है. इस तरह डेयरी और खेती एक-दूसरे को सहारा देते हुए स्वावलंबन का सफल मॉडल प्रस्तुत कर रही हैं.

हर दिन औसतन 300 लीटर दूध का उत्पादन होता है. फैट के आधार पर दूध का औसत मूल्य 36 से 38 रुपए प्रति लीटर मिलने से हर माह लगभग 3 से 4 लाख रुपए की सकल आय बन जाती है.

इसके अतिरिक्त, अच्छी नस्ल की बछड़ियों और पशुओं की बिक्री से उन्हें प्रति वर्ष औसतन 2 से 3 लाख रुपए की अतिरिक्त आमदनी होती है.

इस तरह से प्रति लीटर मिलने से दूध और पशु बिक्री को मिलाकर उनकी अनुमानित वार्षिक आय 25 से 30 लाख रुपए तक पहुंच जाती है, जो किसी भी ग्रामीण युवा के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है.

दूध की बिक्री पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था के तहत होती है. दूध सीधे उनके घर से वाहन द्वारा उठाया जाता है, जहां फैट और एसएनएफ की जांच के बाद उसी आधार पर रेट तय कर भुगतान किया जाता है.

परिवार का पूरा सहयोग डेयरी संचालन में मिलता है, जिससे श्रम लागत नियंत्रित रहती है और पशुओं की बेहतर देखभाल संभव हो पाती है.

वर्तमान में अमित केवल दूध की बिक्री कर रहे रहे हैं, लेकिन भविष्य में में दूध प्रोसेंसिंग कर पनीर, घी और दही जैसे उत्पाद बनाने की योजना पर भी काम कर रहे हैं.

Written by
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