नई दिल्ली. मध्य प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार डेयरी सेक्टर को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. सरकार अब डेयरी नेटवर्क को गांव-गांव तक पहुंचाने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर विस्तार योजना पर काम कर रही है. डेयरी विकास योजना के तहत अगले चरण में प्रदेश के 26 हजार गांवों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही प्रतिदिन दुग्ध संकलन को बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है. इससे किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ेगी.
सरकार केवल दूध उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि डेयरी सेक्टर को आधुनिक और तकनीक आधारित उद्योग के रूप में विकसित करने की कर रही है. इसी उद्देश्य से नई डेयरी प्रसेसिंग यूनिट, दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाइयों और पशु चारा संयंत्रों के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. सरकार का फोकस ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर है, जिससे दूध की गुणवत्ता बेहतर हो और पशुपालकों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके.
पशुपालकों का होगा सम्मान मुख्यमंत्री मोहन यादव
जिला स्तर पर डेयरी से जुड़े पशुपालकों को सम्मानित करने की बात सामने आ रही है. सीएम ने कहा कि उन्हें सम्मानित किया जाएगा.
पशुपालकों के लिए डेयरी संबंधी जागरुकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे. इसका उद्देश्य डेयरी को पारंपरिक तरीके से बाहर निकालकर उसे रोजगार बड़ा माध्यम बनाना है.
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के बीच हुए कार्यअनुबंध के बाद प्रदेश में डेयरी नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है.
वर्ष 2025-26 में 1752 नई दुग्ध समितियों का गठन किया है. इससे बड़ी संख्या में किसान और पशुपालक डेयरी गतिविधियों से जुड़ रहे है.
गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में 153 नए बल्क मिल्क कूलर स्थापित किए गए हैं.
इसके अलावा प्रदूध और दुग्ध उत्पादों की क्रेडिट पर विकी पूरी तरह बंद कर दी गई है, ताकि भुगतान व्यवस्था अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बन सके.
निष्कर्ष
असल में मध्य प्रदेश की सरकार राज्य को मिल्क कैपिटल के तौर पर देखना चाहती है. इसलिए राज्य में ऐसे कई काम किए जा रहे हैं, जिससे दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए और किसानों की इनकम में इजाफा किया जाए. इसी कड़ी में डेयरी सेक्टर में नेटवर्क का दायरा बढ़ाया जा रहा है, जिससे ज्यादा से ज्यादा दूध इकट्ठा किया जा सके.











