नई दिल्ली. नंदी घास गोल्डन तिमोथी या सीटेरिया घास के नाम से भी जानी जाती है. घास सीधे तने के साथ बहुवर्षीय होती है और 1-2 मीटर लम्बाई तक बढ़ती है. पत्तियां हरे से गहरे हरे रंग की होती हैं, फूलों का गुच्छा घना, बेलनकार और नारंगी से बैंगनी रंग का होता है. यह घास मध्यम वर्षा वाले मौसम गर्म-नम जलवायु युक्त क्षेत्रों में अच्छी तरह होती है. आमतौर यह घास 750 से 1500 मिमी. वार्षिक बारिश वाले क्षेत्रों में उगती है. यह गर्म और सूखे मौसम में भी लम्बे समय तक जीवित रह सकती है. यह घास 20 से 25 डिग्री सेंटी. तापमान पर अच्छी तरह उगती है.
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के एक्सपर्ट के मुताबिक यह अन्य गर्म नम क्षेत्रों में पाई जाने वाली घासों से अधिक सर्दी सहन कर सकती है इसलिए, यह पहाडी क्षेत्रों में चारे की खेती के लिए उपयुक्त पाई गई है. इसमें औसतन 8-9 प्रतिशत प्रोटीन होता है.
कैसे करें बुवाई
यह विभिन्न प्रकार की भूमि पर उगाई जा सकती है, घास को दो से तीन बार जुताई के बाद समतल की गई पूर्ण रूप से तैयार भूमि की जरूरत होती है.
यह घास नमी में विकसित होती है लेकिन जल भराव क्षेत्र में नहीं, बरसात के मौसम में नंदी घास की क्यारियों से अच्छी जल निकासी होनी चाहिए.
इसकी बुवाई जड़ के टुकड़ों के साथ-साथ बीज द्वारा भी की जाती है, वर्षा आधारित क्षेत्रों में पौध नर्सरी में तैयार की जा सकती है और वर्षा के मौसम में रोपाई की जा सकती है.
यदि सिंचाई की व्यवस्था उपलब्ध हो तब रोपाई फरवरी से नवम्बर के मध्य कभी भी की जा सकती है. इसकी रोपाई 50 सेमी. दूरी पर लाइनों में करते हैं.
जड़युक्त टुकड़ों की दूरी 40 सेमी रखते हैं. यदि बीज का इस्तेमाल किया जाता है तब 3.5 से 4.0 किग्रा प्रति हैक्टेयर बीज इस्तेमाल होता है.
भूमि की तैयारी के समय 10 टन प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद मिट्टी में मिलायी जा सकती है.
प्रथम कटाई 9-10 सप्ताह पर की जा सकती है और आगे की कटाई प्रत्येक 60 दिन पर की जा सकती हैं.
कटाई के बाद तेज बढ़वार के लिए फसल को 8-10 सेमी. ऊंचाई से काटना चाहिए.
प्रति वर्ष लगभग 50-60 टन प्रति हैक्टेयर हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है.












