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Poultry Farming News: मुर्गियों को टेंपरेचर के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए ऐसा होना चाहिए फार्म

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पोल्ट्री फार्म का प्रतीकात्मक फोटो. livestock animal news

नई दिल्ली. मुर्गी पालन मौसम से होने वाली दिक्कतों सो निपटने के लिए पोल्ट्री फार्म में इंतजाम होना चाहिए. कहने का मतलब ये है कि पोल्ट्री फार्मिंग फार्म ऐसा डिजाइन होना चाहिए कि मुर्गियों को विपरीत तापमान को सहने में ज्यादा दिक्कत न आए. मुर्गी के अनुकूल आवास और बुनियादी ढांचा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में समान रूप से महत्वपूर्ण है. खुले किनारों वाले पारंपरिक मुर्गी शेड अब पर्याप्त नहीं हैं. आधुनिक मुर्गी घरों को बेहतर वेंटिलेशन, इन्सुलेटेड छत और फॉगर व पंखे जैसी शीतलन प्रणालियों के साथ डिजाइन करने की जरूरत है.

राजस्थान के पशुपालन विभाग (Department of Animal Husbandry, Rajasthan) की मानें तो ये परिवर्तन मुर्गी घर के अंदर एक जरूरी तापमान बनाए रख सकते हैं, जिससे पक्षियों पर तनाव कम हो सकता है.

क्या-क्या करें
संसाधन संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बारिश वाला पानी संचयित करें और अपशिष्ट रिसाइकल प्रणालियों को मुर्गी पालन के बुनियादी ढांचे में एकीकृत किया जा सकता है.

छोटे और सीमांत किसानों के लिए, बांस, छप्पर या मिट्टी की ईंटों का उपयोग करके लागत प्रभावी और स्थानीय रूप से मुर्गियों के लिए अनुकूल आवास समाधान किया जा सकता है.

ऐसा करने से मुर्गियों को गर्म तापमान से बचाया जा सकता है. जलवायु-अनुकूल मुर्गी पालन प्रणालियों में चारा और पोषण प्रबंधन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

गर्मी के तनाव के दौरान, पक्षियों को अपना शारीरिक संतुलन बनाए रखने के लिए अतिरिक्त इलेक्ट्रोलाइट्स, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन की आवश्यकता होती है.

चारे की कमी और कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए, किसान चावल की भूसी, सूरजमुखी की खली, कसावा, रसोई का कचरा और काली सैनिक मक्खी के लार्वा जैसे कीटों जैसे वैकल्पिक चारे के स्रोतों का उपयोग कर सकते हैं.

ये विकल्प पारंपरिक अनाज पर निर्भरता कम करते हैं और चारे की लागत कम करते हैं.

पोषक तत्व-विशिष्ट फॉर्मूलेशन और स्वचालित फीडर जैसी सटीक आहार तकनीकें, पोषक तत्वों का कुशल उपयोग सुनिश्चित करती हैं और बर्बादी को कम करती हैं, जिससे उत्पादकता और पर्यावरणीय स्थिरता में सुधार होता है.

Written by
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