नई दिल्ली. मुर्गी पालन का काम ज्यादातर दो चीजों के लिए किया जाता है, एक अंडा उत्पादन और दूसरा मीट उत्पादन. अंडा उत्पादन करने वाली मुर्गियों को लेयर मुर्गियां कहा जाता है, जो फॉर्म में पाली जाती हैं और उन्हें एक निश्चित समय पर दाना पानी दिया जाता है. निश्चित रोशनी दी जाती है. जिसके बाद वो अंडों का उत्पादन करती हैं. वहीं जो चिकन उत्पादन करते हैं वो ब्रॉयलर मुर्गी कहलाते हैं. इन्हें ऐसा फीड दिया जाता है, जिससे तेजी के साथ ग्रोथ हासिल करें. एक ब्रॉयलर चूजा 40 से 45 दिन के अंदर ग्रोथ कर जाता है और उसे फिर मीट के लिए बेच दिया जाता है.
एक्सपर्ट का कहना है कि देसी नस्ल की मुर्गियों को अंडा और मीट दोनों उत्पादन के लिए पाला जाता है और इसका मीट और अंडा दोनों ही महंगा बिकता है. लेयर मुर्गियों को पालकर अंडों का उत्पादन करते हैं लेकिन अक्सर उनके साथ ऐसा होता है कि मुर्गी अंडे का उत्पादन कम कर देती हैं. या वह अपनी क्षमता के मुताबिक अंडा उत्पादित नहीं करती तो ऐसे में बिहार सरकार के डेयरी मत्स्य और पशु संसाधन विभाग की ओर से अंडा उत्पादन बढ़ाने के कुछ तरीके बताए गए हैं. यदि आप भी जानना चाहते हैं तो इस रिपोर्ट को पूरा पढ़ें.
किन बातों का ध्यान देना है, जानें यहां
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जो मुर्गियां अंडों का उत्पादन करती हैं, उन मुर्गियों को रोशनी देने की जरूरत होती है. अगर रोशनी की कमी है तो अंडों का उत्पादन प्रभावित होता है.
एक्सपर्ट का कहना है की लाइटिंग तकरीबन 16 घंटे मुर्गियों को मिलनी चाहिए. क्योंकि मुर्गियों को दिन और रात मिलाकर कुल 16 घंटे रोशनी की जरूरत होती है.
अगर 16 घंटे तक मुर्गियों को रोशनी दी जाती है तो फिर वो अपनी क्षमता के मुताबिक अंडों का उत्पादन करती हैं.
मुर्गियों को कैल्शियम और फास्फोरस की भी जरूरत होती है. जिससे वह सही तरह से अंडों का उत्पादन कर सकें.
अगर मुर्गियों को कैल्शियम और फास्फोरस की कमी होती है तो वो जिन अंडों का उत्पादन करती हैं, उसके छिलके कमजोर होते हैं. ऐसे में अंडे टूटते हैं और नुकसान होता है.
इसलिए कैल्शियम और फास्फोरस की सही मात्रा मुर्गियों को फीड में मिलकर देना चाहिए. ताकि अंडो का उत्पादन भी सही रहे साथ ही अंडे मजबूत भी रहें.
मुर्गियों को तनाव मुक्त माहौल देना चाहिए. फॉर्म को ऐसी जगह नहीं बनाना चाहिए जहां शोर ज्यादा न हो. फॉर्म को शहर के भीड़ वाले इलाके से दूर बनाना चाहिए.
क्योंकि मुर्गियां तनाव वाले माहौल में अंडों का उत्पादन कम करती हैं. जबकि उन्हें तनाव मुक्त माहौल मिलता है तो अंडों का उत्पादन अच्छे से करती हैं.
फार्म में भी शोर नहीं होना चाहिए. साथ ही मुर्गियों को हर वक्त ताजा पानी 24 घंटे उपलब्ध रहना चाहिए. ताकि वह अपनी जरूरत के मुताबिक पानी पी सकें.
निष्कर्ष
यदि आप इन बातों का ख्याल रखते हैं तो मुर्गियों का अंडा उत्पादन कम नहीं होगा. जिससे पोल्ट्री फार्मिंग का फायदा होगा. याद रखें ज्यादा अंडा उत्पादन मतलब ज्यादा मुनाफा.












