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Fish Farming: मछली उत्पादन में नंबर वन राज्य बनेगा यूपी, एक्वा एक्सपो 2026 में हुई चर्चा

एक्वा एक्सपो में मौजूद तमाम मंत्री.

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में पिछले 6 सालों में मछली उत्पादन दोगुना हो गया है. इसे और ज्यादा बढ़ाने और इसके जरिए किसानों की इनकम को दोगुना करने के लिए उत्तर प्रदेश की सरकार कोशिश में जुटी है. इसी कोशिश के तहत उत्तर प्रदेश में पहली बार मीन महोत्सव यानी एक्वा एक्सपो 2026 का आयोजन किया गया है. शुक्रवार को इसका उद्घाटन केंद्रीय मत्स्य पालन पशुपालन डेयरी और पंचायती राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल और यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने किया. इस एक्वा एक्सपो में देश और प्रदेश के 1000 मछली पालकों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. इतना ही नहीं 50 बड़ी कंपनियां यहां आईं और औद्योगिक प्रदर्शनी व स्टॉल भी यहां लगाए गए.

ये आयोजन लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित किया गया था. इस आयोजन को पारंपरिक मत्स्य व्यवसाय, जल संसाधनों के संरक्षण और मछुआरा समाज के सशक्तिकरण को समर्पित किया गया था. कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक तकनीक, मत्स्य पालन के नए अवसरों और सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा की गई. मीन महोत्सव में आजीविका के नए रास्ते भी तलाशे गए.

कैसे नंबर वन बनेगा
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश भारत में तीसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक राज्य है. इस राज्य में वार्षिक मछली उत्पादन 6 वर्षों में दोगुना होकर 13.3 लाख मैट्रिक टन तक पहुंच गया है.

इस बारे में मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने बताया कि राज्य में मछली विकास दर 115.5 फीसद है, जिसका फायदा मछली पालकों को मिल रहा है.

उन्होंने अमृत सरोवरों को मछली पालन योग्य बनाने, तालाबों के पट्टे समय से दिलाने, मछली पालन में विज्ञान और तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया.

वहीं इससे पहले केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि किसानों की इनकम में वृद्धि करने के लिए मत्स्य पालन को बढ़ावा देना जरूरी है और ये इससे संभव भी है.

इस दौरान बताया गया कि प्रदेश में 6 लाख से अधिक जल क्षेत्र उपलब्ध हैं, जहां मत्स्य पालक विशेषज्ञ उद्यमी व निवेदक एक साथ आकर उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ा सकते हैं. जिससे किसानों की इनकम भी बढ़ सकती है.

राज्य को 2047 तक अंतर्देशीय मत्स्य पालन में पहले स्थान पर लाने के लिए और किसानों की इनकम को बढ़ाने के लिए 114.20 करोड़ रुपए की राशि की नई मांग के रूप में भी मंजूरी दी गई.

जिसमें राज्य में इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर की स्थापना करने वहीं तीन मछली मंडी स्थापित करने के लिए 100 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है.

मोती की खेती के बढ़ावा देने के लिए 3 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है. जबकि गोरखपुर में वर्ल्ड फिश प्रोजेक्ट सेंटर की स्थापना के लिए 6 करोड़ रुपए का बजट बनाया गया है.

निष्कर्ष
एक्सपर्ट ने बताया कि फिश सेक्टर का विकास का मतलब ये है कि प्रोटीन की उपलब्धता होगी. रोजगार भी बढ़ेंगे इसलिए इसे बढ़ावा देना जरूरी है.

Written by
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