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Fish Farming Scheme: सरकार इस योजना के तहत इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर को दे रही बढ़ावा, पढ़ें डिटेल

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग (Department of Animal and Fishery Resources) की ओर से चौर विकास योजना बनाई गई है. इस योजना के तहत इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है. ताकि जो भी किसान मछली पालन करना चाहते हैं, वह इसके अलावा एक दूसरा व्यवसाय भी करें. जैसे मुर्गी पालन, पशुपालन, या फिर दूसरे काम और ऐसा करके वो अपनी इनकम को और ज्यादा बढ़ा सकते हैं. बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की अपर सचिव डॉ. विजय लक्ष्मी ने इस संबंध में अहम जानकारी साझा की है.

उन्होंने कहा कि चौर विकास योजना के तहत विभाग ने पहले जो लक्ष्य तय किया था, उसे पूरा किया गया है वहीं अब फिर उससे बड़ा टारगेट सेट किया है. जिसमें ज्यादा से ज्यादा किसानों को फायदा पहुंचाने की योजना है. उन्होंने बताया कि सामान्य वर्ग के किसानों को चौर विकास योजना के तहत 50 फीसद तक सब्सिडी दी जा रही है. वहीं अन्य वर्ग के किसानों को 70 फीसद तक सब्सिडी सरकार दे रही है.

क्या-क्या कर सकते हैं किसान
उन्होंने बताया कि चौर विकास योजना के तहत काफी सारे कलस्टर का विकास किया गया है.

कई ऐसे चौर हैं, जिन्हें इंटीग्रेटेड क्लस्टर के रूप में भी विकसित किया गया है.

उन्होंने कहा कि योजना का फायदा उठाकर मछली पालक मछली पालन के साथ-साथ पौधे वगैरह लगाकर भी कमाई कर सकते हैं.

इसके अलावा तालाब के किनारे फलों के पेड़, अमरूद, पपीता लगाकर भी किसान भाई की कमाई हो सकती है.

उन्होंने बताया कि मछली और बत्तख पालन के काम को भी बढ़ावा देने का काम विभाग की तरफ से किया जा रहा है.

इसके अलावा मछली के साथ मुर्गी पालन भी करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि बहुत से ऐसे किसान हैं, जिनके पास जमीन है. वह मछली पालन के साथ-साथ गाय पालन भी कर रहे हैं.

निष्कर्ष
जो किसान भाई मछली पालन के साथ-साथ दूसरे अन्य काम को कर रहे हैं उसी को इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर कहा जाता है. उन्होंने बताया कि बड़े पैमाने पर राज्य में किसान इस काम को कर रहे हैं. खास तौर पर सिवान से जुड़े इलाकों में ज्यादा यह काम हो रहा है.

Written by
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