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Fisheries: फिशरीज सेक्टर में चुनौतियों के समाधान के लिए स्टार्टअप्स को मिली सरकारी मदद

अगर आप छोटे गड्ढे में मछली पालन का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको तालाब के आकार को चुनना होगा. एक से 2000 स्क्वायर फीट के तालाब में आप बढ़िया मछली पालन कर सकते हैं.
तालाब में मछली.

नई दिल्ली. फिशरीज सेक्टर में क्षेत्रीय चुनौतियों के समाधान में स्टार्टअप्स की भूमिका को समझते हुए, सरकार ने मछली पालन और जलीय कृषि में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए तय कार्यक्रम चलाए हैं. उद्यमियों को एक साथ लाने और उन्हें क्षेत्रीय अवसरों का मजबूती से फायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मत्स्य पालन विभाग ने मत्स्य पालन स्टार्टअप सम्मेलनों की एक श्रृंखला का आयोजन किया. इन आयोजनों ने उभरते समाधानों को प्रदर्शित करने, सहयोग को बढ़ावा देने और मछली पालन मूल्य श्रृंखला में नवाचार को मजबूत करने के लिए रोडमैप तैयार करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया है.

इसी के अनुरूप, उत्पादकता, स्थिरता और बाजार पहुंच से संबंधित समाधान प्रस्तुत करने वाले स्टार्टअप्स की पहचान करने के लिए मत्स्य पालन स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज की शुरुआत की गई है. जिसमें डिजिटल कृषि प्रबंधन उपकरणों से लेकर समुद्री खाद्य आपूर्ति श्रृंखला नवाचारों तक के प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं. चयनित स्टार्टअप्स को अनुदान, मार्गदर्शन और इनक्यूबेशन सहायता प्रदान की गई, जिसमें मत्स्य विभाग के क्षेत्रीय संस्थानों ने प्रायोगिक कार्यान्वयन, उद्योग संपर्क और निवेशक जुड़ाव को सुगम बनाया.

कितने कार्यक्रम आयाजित किए
पहले संस्करण की प्रतिक्रिया से उत्साहित होकर, नवाचार परितंत्र को और मजबूत करने के लिए एक दूसरा स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज शुरू किया गया.

जिसके तहत चयनित स्टार्टअप्स को मत्स्य विभाग के क्षेत्रीय संस्थानों और मत्स्य अनुसंधान संगठनों, जिनमें आईसीएआर और राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड शामिल हैं, के माध्यम से प्रारंभिक निधि और इनक्यूबेशन सहायता प्राप्त होती है.

इसके अलावा, मत्स्य पालन विभाग मत्स्य मंथन नामक एक समानांतर ज्ञान-निर्माण व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन करता है. इसका उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र में नवाचार परितंत्र को मजबूत करना है.

यह विशेष श्रृंखला विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और अभ्यासकर्ताओं को उभरती प्रौद्योगिकियों, टिकाऊ प्रथाओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ लाती है.

यह मंच संरचित ज्ञान साझाकरण को सक्षम बनाता है, साक्ष्य-आधारित नीति विकास का समर्थन करता है.

साथ ही ये ये भी सुनिश्चित करने में मदद करता है कि विज्ञान, उद्योग और स्टार्टअप से प्राप्त समझ क्षेत्र के विकास के लिए व्यावहारिक रणनीतियां बनाने में सहायक हो. मत्स्य पालन विभाग ने अब तक 11 सत्र आयोजित किए हैं.

मत्स्य पालन विभाग ने मत्स्य पालन स्टार्टअप्स द्वारा व्यावसायिक मॉडल विकसित करने में मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए पांच मत्स्य पालन व्यवसाय इनक्यूबेशन केंद्रों की स्थापना का भी समर्थन किया है.

इनमें एलआईएनएसी-एनसीडीसी मत्स्य पालन व्यवसाय इनक्यूबेशन केंद्र (एलआईएफआईसी), गुवाहाटी बायोटेक पार्क, असम, राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान (मैनेज), हैदराबाद, आईसीएआर-केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान (सीआईएफई), मुंबई और आईसीएआर-केंद्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईएफटी), कोच्चि शामिल हैं.

ये सभी पहलें मिलकर एक अधिक गतिशील और भविष्य के लिए मछली पालन स्टार्टअप परितंत्र को आकार दे रही हैं, जहां नवाचार, प्रौद्योगिकी और नीतिगत समर्थन मिलकर इस क्षेत्र का आधुनिकीकरण कर रहे हैं.

मजबूत संस्थागत समर्थन, बढ़ती उद्यमशीलता भागीदारी और सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता के साथ, भारत मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में नए अवसरों को खोलने और दीर्घकालिक, टिकाऊ विकास को गति देने के लिए अच्छी स्थिति में है.

Written by
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