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Fisheries: फिशरीज सेक्टर में पीएमएमएसवाई के तहत खर्च किए 21 हजार करोड़, बढ़ा सीफूड एक्सपोर्ट

केज मछली तकनीक के कई सारे लाभ हैं. मछलियां एक सीमित क्षेत्र में रखी जाती हैं
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. भारत सरकार का मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय (MoFAH&D) फिशरीज सेक्टर के सभी तरह के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू कर रहा है. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत, भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने पिछले पांच वर्षों में देश में मछली पालन और जलीय कृषि के विकास के लिए कुल 21 हजार 274.13 करोड़ की परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है. 21 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च में केंद्र सरकार 9 हजार 189.74 करोड़ रुपए खुद खर्च किया है. भारत सरकार के इस तरह के कदम से भारत का सीफूड एक्सपोर्ट 2013–14 में 30 हजार 213 करोड़ से बढ़कर 2024–25 में 62 हजार 408 करोड़ से ज्यादा हो गया है. यानी इसमें दो गुना से भी अधिक इजाफा हुआ है.

भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने वाणिज्य विभाग के तहत समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) तथा अन्य संबंधित पक्षों के सहयोग से भारत–यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर जागरूकता और संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किए हैं. इसके अंतर्गत हितधारकों से परामर्श, सीफूड निर्यातक बैठकें तथा मूल्य संवर्धन पर चिंतन शिविर का आयोजन किया गया.

बाजार को किया जाएगा मजबूत
मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार ने संभावित भागीदार देशों के दूतावासों और उच्चायोगों के साथ भी कई बैठकें की हैं, ताकि सहयोग की संभावनाओं की तलाश की जा सके.

इन बैठकों का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार सहयोग को मजबूत करना, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना, जैव-सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के अनुपालन को सुदृढ़ करना, स्वचालन (ऑटोमेशन) को आगे बढ़ाना तथा अनुसंधान एवं विकास (आरएडडी) साझेदारियों को प्रोत्साहित करना रहा है.

इसके साथ ही व्यापक लगातार विकास पहलों को भी समर्थन दिया जा रहा है. सरकार उच्च मूल्य वाली प्रजातियों जैसे सीबास, कोबिया, पोम्पानो, मड क्रैब, गिफ्ट तिलापिया, ग्रूपर, पी. मोनोडोन, स्कैम्पी और समुद्री शैवाल को शामिल करते हुए विविधीकृत जलीय कृषि को भी बढ़ावा दे रही है.

इसमें नए बाजारों की पहचान और मौजूदा बाजारों को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

इन प्रयासों के तहत व्यापार सुगमता को सशक्त करना, व्यापार प्रतिनिधिमंडलों और तकनीकी अध्ययन यात्राओं के माध्यम से निर्यात संवर्धन को बढ़ावा देना तथा खरीदार–विक्रेता बैठकें आयोजित करना शामिल है.

Written by
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