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Animal Husbandry: कैसे भेड़-बकरी और खरगोश से हो सकती है ज्यादा कमाई, यहां सीख सकते हैं आप

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प्रतीकात्मक फोटो:

नई दिल्ली. पशुपालन से किसानों को अच्छी आमदनी हो सकती है. अगर किसान पशुपालन करते हैं तो इससे उनके पास आमदनी का एक और जरिया बन जाता है. इस वजह से सरकार भी पशुपालन को बढ़ावा दे रही है. ता​कि किसान इस काम में आगे आएं. गौरतलब है ​कि पशुपालन सिर्फ गाय—भैंस का ही नहीं किया जा सकता है. ​बल्कि आप भेड़-बकरी को भी पालकर कमाई कर सकते हैं. इतना ही नहीं खरगोश पालकर भी अच्छी कमाई होती है. एक्सपर्ट का कहना है कि भेड़-बकरी और खरगोश पालकर किसान कमाई तो कर सकते हैं लेकिन अगर वो ट्रेनिंग लेकर ये काम करें तो फिर मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है.

एक्सपर्ट का कहना है कि ​किसी भी काम को बिना ट्रेनिंग लिए करना उचित नहीं है. उसी तरह से भेड़-बकरी और खास करके खरगोश पालते हैं तो इसके लिए भी ट्रेनिंग जरूर लेना चाहिए, तभी इसका फायदा मिलेगा. वहीं अगर आप इस काम को करने का इरादा रखते हैं तो आपके पास ट्रेनिंग लेने का एक सुनहरा अवसर है. दरअसल, केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसन्धान संस्थान अविकानगर मे 17 मार्च से आठ दिवसीय ट्रेनिंग की शुरुआत हो गई है.

एक्सपर्ट से संवाद करने का मिलेगा मौका
17 से 24 मार्च तक चलने वाले 16वें राष्ट्रीय कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत निदेशक डॉ. अरुण कुमार की अध्यक्षता में हुई. ट्रेनिंग प्रोग्राम के अंतर्गत सभी पशुपालक किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से भेड़-बकरी और खरगोश पालन पर विस्तार से लेक्चर्स एवं प्रैक्टिकल ज्ञान दिया जायेगा. सभी पशुपालक किसानों को निदेशक ने सम्बोधन बताया कि आप अपने भेड़-बकरी और खरगोश पालन के उदेश्य को पूरा करने के लिए आवश्यक जानकारी इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में दी जाएगी. जहां किसान एक्सपर्ट को सुनकर और वैज्ञानिकों से संवाद के माध्यम बारीकियां सीख सकते हैं.

इस तरह हो सकती है कमाई
गौरतलब है कि वर्तमान समय मे छोटे पशुओ को स्टॉल फीड विधि से पालन करके ही अच्छा आमदनी कमाई जा सकती है, क्योंकि मौजूदा समय में अच्छे चारागाह की कमी और खेती की जमीन की तारबन्दी होने के कारण चराई आधारित तरीके मे बदलाव की सख्त जरुरत है. इसलिए आप अब अच्छे पशुओं की नस्ल चयन करके बेहतर आवास, पोषण, स्वास्थ्य एवं चरागाह विकास के साथ विभिन्न वर्षभर मौसम आधारित सावधानी रखकर ही आमदनी कमा सकते हैं.

मीट उत्पादन के लिए पालें छोटे पशु
मांस उत्पादन के लिए छोटे पशुओ भेड़ और बकरी को कम संसाधनों में पाला जा सकता है. प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयक डॉ. सुरेश चंद शर्मा एवं डॉ सत्यवीर सिंह डागी द्वारा किया जा रहा है. प्रशिक्षण कार्यक्रम मे डॉ रणधीर सिंह भट्ट, डॉ जी गणेश सोनावणे, डॉ अजय कुमार, डॉ लीला राम गुर्जर, डॉ अरविन्द सोनी एवं डॉ अमरसिंह मीना ने भी सभी प्रशिक्षण मे भाग ले रहे हैं. राजस्थान के किसानो के परिचय के साथ आवश्यक जानकारी शेयर की गई है.

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