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Agra News: सोना गिरवी रखकर गौशाला की गायों का भर रहे पेट, डर या आस्था! पढ़िए क्या है मामला

प्रतिदिन प्रति गोवंश के हिसाब से चारे को 50 रुपये मिलते है. ग्राम पंचायतों के अधीन गोशालाओं की संख्या 79 है. कुल गोशालाएं - 93, संरक्षित गोवंश- 19 से 20 हजार हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. इसे आस्था कहें या प्रशासन का डर मवेशियों के लिए चारे का इंतजाम आगरा के दो प्रधान अपने स्तर से करने में जुटे हैं. सोना गिरवी रखकर वे गायों को चारा मुहैया करा रहे हैं. जी, हां हम बात कर रहे हैं, आगरा में फतेहाबाद विकास खंड के ग्राम पंचायत मेवली कला के नगला बेहड और नगरचंद की. नगरचंद के ग्राम प्रधान ने सोना गिरवी रखा और अब तक करीब चार लाख रुपये का लोन लेकर इन गोवं​शों की देखरेख में लगा दिया है. शासन और प्रशासन द्वारा चलाई जा रही स्कीम और सख्ती के चलते लगातार बेसहारा पशुओं के भोजन का प्रबंध करने में जुटे हैं. ये हाल इसलिए हैं क्योंकि आगरा जनपद में पिछले दो महीनों में गोशालाओं में पेमेंट नहीं पहुंचा है. जिसके कारण गांव के प्रधान अपना सोना गिरवी रखकर इनके चारे का इंतजाम करने में लगे हैं.

आगरा जिले की गोशालाओं की बात करें तो ताजगरी में टोटल 92 गोशाला हैं. जिनमें 19 से 20 हजार बेसहारा गोवंश पाले जा रहे हैं. ग्राम पंचायतों के अधीन संचालित गोशालाओं की देखभाल की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और पंचायत सचिवों को सौंपी गई है. इन्हें ही चारे से लेकर पानी, धूप-सर्दी से बचाव के बंदोबस्त करने हैं. अगर कोई गोवंश किसी कारण मर जाता है. तो उसकी जवाब देही प्रधान और सचिव की है. इस जिम्मेदारी को प्रधान पूरी अब निभा रहे हैं.

उधार देना बंद हुआ तो गिरवी रखा सोना नगला बेहड के ग्राम प्रधान मुकेश कुमार धाकरे बताते हैं कि काफी समय से इधर-उधर से भूसा व दाना चुनी आदि का इंतजाम किया, ज्यादा उधार हो जाने पर सामान देने से लोगों ने मना कर दिया, जिसके बाद उन्होंने करीब चार तोला सोना गिरवी रखा और उससे मिले डेढ़ लाख रुपये से भूखे गोवंशों का पेट भरना शुरू किया. पिछले दो महीने से पेमेंट नहीं हुआ है. इसके कारण ये सब करना पड़ रहा है.

गोवंशी का पेट भरना होता है मश्किल नगर चंद ग्राम पंचायत की गोशाला में बड़ी संख्या में बेसहारा पशु हैं. इनके आहार आदि के लिए मिलने वाला पैसा करीब डेढ़ महीने से आया है. ऐसे में इन पशुओं का पेट भरना मुश्किल हो रहा है. पशुओं का पेट भरने के लिए अब तक करीब चार लाख रुपये से अधिक का लोन लेकर इनका पेट भरा जा रहा है.

चीत गोशाला में हैं सात सौ के करीब पशु वहीं बात अगर खेरागढ़ तहसील की ग्राम पंचायत चीत की करें तो यहां की गोशाला में करीब 705 पशु हैं. यहां पर भी पिछले 90 दिनों से पेमेंट नहीं ​मिला है और हालात ये हैं कि यहां के ग्राम प्रधान बनिया पर लाखों रुपये का कर्जा हो गया है. अभी तक ये उधार लेकर काम चला रहे हैं. आगरा की ज्यादातर गोशालाओं का यही हाल है.

प्रतिदिन प्रति गोवंश के हिसाब से चारे को 50 रुपये मिलते है. ग्राम पंचायतों के अधीन गोशालाओं की संख्या 79 है. कुल गोशालाएं – 93, संरक्षित गोवंश- 19 से 20 हजार हैं.

नगला बेहड के ग्राम प्रधान मुकेश कुमार धाकरे ने बताया कि जनवरी-फरवरी महीने की पेमेंट नहीं हुई है. गोशाला में मवेशियों की संख्या 138 है. लोन लेकर सामान लिया वो भी बंद हो गया है, अब सोना गिरवी रखकर चारे आदि की व्यवस्था की गई है.

नीरज कुमार, प्रधान, नगरचंद ने बताया कि पिछले 60 दिनों से पेमेंट नहीं होने से उधार का चारा खिला रहे थे, अब चार लाख से अधिक का कर्ज हो गया है. उनके यहां करीब साढ़े तीन सौ पशु संरक्षित हैं.

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