Home डेयरी Dairy: यहां जानें गिनी घास की खासियत, क्यों है डेयरी पशुओं के लिए फायदेमंद, खेती का तरीका भी पढ़ें
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Dairy: यहां जानें गिनी घास की खासियत, क्यों है डेयरी पशुओं के लिए फायदेमंद, खेती का तरीका भी पढ़ें

गिनी घास.

नई दिल्ली. डेयरी पशुओं के लिए गिनी घास अच्छी होती है. ये गर्म और नम जलवायु युक्त क्षेत्रों की सबसे ज्यादा इस्तेमाल में ली जाने वाली छाया के प्रति सहनशील, 1-2 मीटर ऊंचाई तक बढ़ने वाली बहुवर्षीय घास है. यह 15-38 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान में अच्छा प्रदर्शन करती है. यह कृषि वानिकी के घटक की तरह फायदेमंद तरीके से उगाई जा सकती है और यह बगीचों और दूसरे वृक्षों के साथ अच्छी उपज देती है. इसमें औसत 10-12 प्रतिशत प्रोटीन होता है. जो डेयरी पशुओं को उत्पादन करने में मदद करती है.

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की मानें तो ये एक बेहतरीन चारा फसल है. इसलिए डेयरी फार्मिंग करने वाले पशुपालकों को इस बारे में जरूर मालूम होना चाहिए.

खेती तरीका क्या है
घास तमाम कैटेगरी की मिट्टी के लिए अनुकूल होती है और अच्छे जल निकासी वाली हल्की भूमि पर भली प्रकार उगती है.

बुवाई के लिए दो से तीन जुताई के बाद खेत को समतल करना चाहिए. यह भारी चिकनी मिट्टी और जल भराव की स्थिति को सहन नहीं कर सकती है.

इसकी रोपाई का सबसे अनुकूल मौसम मॉनसून की शुरुआत में मई-जून के दौरान होता है. सिंचाई वाले क्षेत्रों में रोपाई वर्षभर किसी भी समय की जा सकती है.

बीजों में अंकुरण कम होने की वजह से अलैंगिक विधि से प्रजनन किया जाता है, रोपाई के लिए जड़ों के टुकड़े प्राप्त करने के लिए, पुराने गुच्छे निकालकर जड़ वाले टुकड़ों को अलग कर लिया जाता है।

जड़ के टुकड़ों को 50×25 सेमी. की दूरी पर 15 सेमी. ऊंची मेंड़ो पर लगाना चाहिए.

बीज द्वारा उगाने के लिए 3 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बीज का इस्तेमाल करना चाहिए, बीज को नर्सरी में बोना चाहिए तथा पौध की मुख्य खेत में रोपाई की जानी चाहिए.

फसल के लिए 10 टन गोबर खाद, 50 किग्रा. फोस्फोरस और 50 किग्रा. पोटाश प्रति हैक्टेयर की मात्रा देनी चाहिए.

अधिक उपज के लिए प्रत्येक कटाई के एक सप्ताह बाद 40 किग्रा नत्रजन प्रति हैक्टेयर की दर से प्रयोग में लाना चाहिए.

प्रथम सिंचाई रोपाई के तुरंत बाद और आगे की सिंचाई मिट्टी में नमी और वर्षा के आधार पर करनी चाहिए.

आमतौर पर सिंचाई की आवश्यकता 15-20 दिन में एक बार होती है, प्रत्येक कटाई के बाद सिंचाई पुनः तेज बढ़वार में सहायक होती है.

फसल 1.5 मीटर लम्बी होने पर कटाई के लिए तैयार हो जाती है, भूमि की सतह से 15-20 सेमी. ऊपर से काटने की सलाह दी जाती है.

आमतौर पहली कटाई के लिए फसल 9-10 सप्ताह में तैयार हो जाती है और इसके बाद की कटाई 40-45 दिन के अंतर पर की जाती हैं, एक वर्ष में 6-7 बार कटाई की जा सकती हैं.

प्रति वर्ष लगभग 50-65 टन प्रति हेक्टेयर हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है.

Written by
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