Home पोल्ट्री Poultry: मीट और अंडा उत्पादन के लिए कोडो, कुडू और कुट्टानाड बत्तख है बेहतरीन, NBAGR ने दी मान्यता
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Poultry: मीट और अंडा उत्पादन के लिए कोडो, कुडू और कुट्टानाड बत्तख है बेहतरीन, NBAGR ने दी मान्यता

बत्तख की तीन नस्लें.

नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग के काम में बत्तख का भी पालन किया जाता है. सिर्फ मुर्गे-मुर्गियों को ही नहीं बल्कि बत्तखों को भी पालकर अच्छी कमाई की जा सकती है. ऐसे तो बत्तखों की बहुत सी नस्ल है, जिन्हें पालने से ज्यादा फायदा होता है. वहीं हाल ही में पशु-पक्षियों की नई नस्लों को मान्यता देने वाली संस्था नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेज (NBAGR) ने कई बत्तखों की नई नस्ल को मान्यता दी है. अगर आप इन नस्लों को पालते हैं तो बत्तख पालन करके अच्छी कमाई की जा सकती है.

नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेज (NBAGR) की ओर से बताई गई कुछ नस्लों के बारे में लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) यहां आपको जानकारी देना जा रहा है. ​जिसमें झारखंड की कोडो बत्तख, ओडिशा की कुडू नस्ल की बत्तख और केरल की कुट्टानाड नस्ल की बत्तख शामिल है. ये तीनों ही नस्ल अपने आप में खास हैं, आइए इस बारे में जानते हैं.

कोडो बत्तख की क्या है खासियत
कोडो बत्तख झारखंड के पश्चिम सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, रांची, पाकुड़ जिलों की मूल निवासी है.

कोडो बत्तखों के पंख काले और सफेद या भूरे और सफेद रंग के होते हैं. कई पक्षियों की चोंच हरे-काले रंग की होती है.

टांगें और जाली मुख्य रूप से नारंगी रंग की होती हैं. शरीर थोड़ा सीधा और चोंच का आकार क्षैतिज होता है.

इन बत्तखों को अंडे और मांस के लिए पाला जाता है. सालाना अंडे का उत्पादन 40-90 के बीच होता है.

कम लागत वाली प्रणाली में जीवित रहने की क्षमता रखती हैं. कुल आबादी लगभग 42 हजार है.

कुडू बत्तख के बारे में जानें
इस नस्ल का मूल क्षेत्र ओडिशा का मयूरभंज जिला है. कुडू बत्तखों के पंख हल्के भूरे मोजेक पैटर्न के होते हैं.

गर्दन के चारों ओर सफेद घेरा होता है. चोंच, टांगें और पैर नारंगी रंग के होते हैं. इन्हें अंडे और मांस के लिए पाला जाता है.

एक अच्छी अंडा देने वाली बत्तख के रूप में, कुडू बत्तख का औसत वार्षिक अंडा उत्पादन 149 है.

अंडे का आकार बड़ा होता है, जिसका औसत वजन 64 ग्राम होता है.

वयस्क शरीर का वजन नर में 1.3 किलोग्राम और मादा में 1.2 किलोग्राम होता है. अनुमानित आबादी लगभग 64 हजार है.

कुट्टानाड बत्तख के बारे में पढ़ें
यह बत्तख केरल के अलाप्पुझा, कोट्टायम और पठानमथिट्टा जिलों में पाई जाती है. अनुमानित आबादी लगभग 17.8 लाख है.

ये दो रंग की की होती है. काले-भूरे पंख (चारा) और हल्के और विभिन्न पंख (चेमबल्ली), चारा में चोंच हल्के नारंगी रंग की होती है.

जबकि चेमबल्ली में पीली होती है. चोंच पर काले धब्बे देखे जाते हैं. कुट्टानाड बत्तख सालाना 200-210 अंडे देती है.

अंडे का आकार 69.15 ग्राम होता है. वयस्क बत्तखें, जिनका वजन 1.6 से 2 किलोग्राम के बीच होता है, दोहरे उद्देश्य वाली होती हैं. जो अंडे और मांस उत्पादन दोनों के लिए मूल्यवान होती हैं.

उनकी उत्कृष्ट चारा खोजने की क्षमता इस नस्ल की स्थिरता और ‘डक-राइस’ एकीकृत उत्पादन प्रणाली में दक्षता को और प्रमाणित करती है.

Written by
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