Home पोल्ट्री UP फॉर्मर्स का सवाल, ग्राहकों को हेल्दी और फार्मर को मिल रहा अच्छा रेट, तो फिर क्यों नई पॉलिसी पर लगी रोक
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UP फॉर्मर्स का सवाल, ग्राहकों को हेल्दी और फार्मर को मिल रहा अच्छा रेट, तो फिर क्यों नई पॉलिसी पर लगी रोक

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश सरकार ने जब अंडों के स्टोरेज और सप्लाई के संबंध में कोल्ड चैन का पालन करने के मकसद से अप्रैल में न्यू‍ ऐग पॉलिसी लागू की तो इसका कई फायदा हुआ. एक तो रिटेल बाजार में ग्राहकों को अच्छा हेल्दी अंडा खाने को मुहैया होने लगा. जबकि जनता के अलावा पोल्ट्री फार्मर को अंडे सही दमा मिला. इससे फार्मर खासा खुश थे. क्योंकि उन्हें अच्छा मुनाफा मिलने लगा. वहीं जैसे ही ये नए नियम लागू हुए दूसरे राज्यों से नियमों के खिलाफ कोल्ड स्टोरेज से निकलने वाले अंडों की आमद यूपी में रुक गई. हालांकि तीन महीने बाद ही अचानक से जुलाई में इस पॉलिसी को ये कहते हुए रोक दिया गया कि कुछ पोल्ट्री फार्मर ने प्रत्यावेदन दिए हैं.

जिसके बाद से फॉर्मर यूपी सरकार से इस पॉलिसी को दोबारा लागू करने की मांग कर रहे हैं. वहीं कुक्कुट विकास समिति, यूपी और उससे जुड़े पोल्ट्री फार्मर का ये कहना है कि नई पॉलिसी से फार्मर और ग्राहक दोनों को ही फायदा मिल रहा था तो फिर किसके कहने पर इसपर रोक लगा दी गई. फार्मर्स ने अंडे का सही दाम दिलाया जाने के लिए सरकार को पत्र भी लिखा है. वहीं यूपी पोल्ट्री फार्म एसोसिएशन के अध्यक्ष नवाब अली का कहना है कि बाहर से आने वाले अंडे एसी वाहन से ही आएंगे. ऐसा लगताा है कि प्रदेश के बाहर के अंडा माफ़ियाओं ने राजनीतिक लोगों को मिलाकर यूपी में अंडों के रेट को खराब कर रहे हैं. वहीं प्रदेश के कोल्ड स्टोरेज में अंडे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड एवं कोल्ड स्टोरेज विनियमन अधिनियम 1976 का भी माखौल उड़ाया जा रहा है.

क्या है रेट डिक्लेरेशन सिस्टम, क्यों हो रही इसकी मांग

कुक्कुट विकास समिति उत्तर प्रदेश एवं पूर्वांचल अंडा उत्पादक कृषक कल्याण समिति ने सरकार से उत्तर प्रदेश में रेट डिक्लेरेशन सिस्टम के गठन की मांग की है. वहीं पोल्ट्री फार्मर्स ने पशुपालन निदेशालय, लखनऊ में अपनी समस्याएं और मांग अफसरों के सामने रखी है. समिति के प्रदेश अध्यक्ष वीपी सिंह का कहना है कि हरियाणा स्थित बरवाला के ट्रेडर्स द्वारा जो रेट खोला जाता है उसी रेट पर उत्तर प्रदेश में अंडा बेचा जाता है जो यूपी के फार्मर के साथ अन्याय है. यूपी में पोल्ट्री पॉलिसी के तहत अधिक से अधिक फार्म लगे, इसके लिए सरकार को चाहिए कि जिनती अंडों की लागत आती है उस हिसाब से रेट तय करे. कहा कि अंडा सेक्टर का उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एक ट्रिलियन अर्थव्यवस्था में अहम रोल है. य​दि वक्त रहते सरकार ने इसपर ध्यान नहीं दिया तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी चोट लगेगी.

यूपी में आ रहे हैं खराब अंडे

अध्यक्ष वीपी सिंह का आरोप है कि प्रदेश में दूसरे प्रदेशों से खराब अंडे लाए जा रहे हैं. इन गुणवत्ता सही नहीं है, इसलिए ये सस्ते होते हैं. जबकि यूपी के अंडे गुणवत्ता वाले होते हैं इसके चलते उनकी कास्ट ज्यादा आती है. वहीं प्रदेश में दूसरे राज्यों से कोल्ड स्टोरेज में रखे महीनों पुराने अंडे आते हैं. जिससे यहां के किसानों को गुणवत्ता युक्त अंडा देने के बावजूद उनका रेट नहीं मिल पाता है. वहीं समिति के प्रदेश सचिव मोहम्मद नाजिम ने बताते हैं कि प्रदेश सरकार द्वारा इन मसलों पर ध्यान न देने के चलते राज्य में 70 फार्म बंद हो चुके हैं और बहुत से फार्म बंद हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि जबकि इस सेक्टर में प्रदेश में प्रत्यक्ष रूप से बीस लाख एवं अप्रत्यक्ष रूप से एक करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है. एऐसे में उन लोगों को रोजगार भी नहीं मिल सकेगा. पूर्वांचल अंडा उत्पादक कृषक कल्याण समिति के अध्यक्ष संदीप मोदनवाल ने ये कहा है कि अंडा माफियाओं ने प्रदेश सरकार को ये बताया कि नई पॉलिसी से अंडों के रेट बढ़ गए हैं, जो गलत है.

अंडों पर कोल्ड स्टोरेज डिटेल लिखवाने की उठी मांग

वहीं पूर्वांचल अंडा उत्पादक कृषक कल्याण समिति के सचिव इक़बाल अहमद और उपाध्यक्ष डीपी सिंह कहते हैं यूपी में बिकने वाले अंडों पर उत्पादन तिथि उत्पादन का स्थान प्रदेश का नाम जरूर लिखा जाए. कुक्कुट विकास समिति के मीडिया प्रभारी वसीउल हसन ने कहा कि अंडों के परिवहन और परीक्षण से संबंधित केंद्र व राज्य सरकार द्वारा स्थापित मानकों एवं नियमों का पालन किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रदेश का किसान अपने लिए कोई वरीयता या संरक्षण नहीं चाहताा है, बस उसकी मांग ये है कि बाजार में नियम के मुताबिक अंडों को बेचा जाए. लखनऊ के जिलाध्यक्ष जुनून नोमानी ने सरकार से मांग की है कि निदेशालय स्तर पर बाहर से आने वाले अंडों का रिकॉर्ड रखा चाहिए.

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