नई दिल्ली. केंद्रीय बजट 2026 में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जो ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और पशुधन अर्थव्यवस्था के सतत विकास को सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. बजट के प्रमुख प्रावधानों में उत्पादकता, पशु स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया है. किसानों की संपत्ति की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण पशुधन उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए नस्ल सुधार कार्यक्रमों, पशु चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और रोग निवारण पहलों को अतिरिक्त सहायता दी गई है.
बजट में बेहतर दूध स्टोरेज, प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन अवसंरचना के माध्यम से डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने पर भी विशेष जोर दिया गया है. दूध उत्पादन और उससे संबंधित गतिविधियों में लगे सहकारी समितियों और पशुधन किसान उत्पादक संगठनों (एलएफपीओ) को समर्थन देने पर विशेष ध्यान दिया गया है. बजट पशुपालन में नवाचार, प्रौद्योगिकी के उपयोग और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देता है. चारा विकास, पशु आहार सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल पशुधन प्रथाओं से संबंधित पहल इस क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में सहायक होंगी.
लोन आधारित सब्सिडी कार्यक्रम शुरू होगा
बजट 2026 में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन पर दिए गए अतिरिक्त जोर से रोजगार सृजन, पोषण सुरक्षा में सुधार और ग्रामीण आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद है.
सरकार का पशु चिकित्सा पेशेवरों की संख्या बढ़ाकर 20,000 से अधिक करने के उद्देश्य से, निजी क्षेत्र के पशु चिकित्सा एवं अर्ध-पशु चिकित्सा महाविद्यालयों, पशु अस्पतालों, निदान प्रयोगशालाओं और पशु प्रजनन केंद्रों की स्थापना के लिए लोन आधारित पूंजी सब्सिडी सहायता योजना शुरू करने का प्रस्ताव है. भारतीय एवं विदेशी संस्थानों के बीच सहयोग को भी सुगम बनाया जाएगा.
केंद्रीय बजट 2026-27 में पशुपालन में उद्यमिता और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लोन आधारित सब्सिडी योजना का प्रस्ताव है.
जिससे पशुधन, दुग्ध उत्पादन और मुर्गी पालन उद्यमों को लाभ होगा. इस उपाय का उद्देश्य किसानों को आधुनिक उपकरण अपनाने, उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में मूल्य श्रृंखला विकसित करने में सहायता करना है.
पशुधन, दुग्ध उत्पादन और मुर्गीपालन की मूल्य श्रृंखलाओं का आधुनिकीकरण और विस्तार, जिससे उत्पादकता और ग्रामीण रोजगार में वृद्धि हो.
“भारत विस्तार” प्लेटफॉर्म जैसे एआई-आधारित कृषि उपकरण, जिनका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन और पशुधन उत्पादकों सहित किसानों के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना है.
ग्रामीण आय विविधीकरण प्रयासों के तहत दूध उत्पादन और पशुधन किसानों के लिए ऋण और उद्यमिता सहायता पर जोर दिया गया है.












