Home मछली पालन Fisheries: सीफूड एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए तीन बातों पर किया जा सकता है फोकस
मछली पालन

Fisheries: सीफूड एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए तीन बातों पर किया जा सकता है फोकस

Fisheries, Fish Rate, Government of India, Live Stock Animal News, Boat
मछली पकड़ते मछुआरे (फोटो CMFRI)

नई दिल्ली. भारत 2024-25 में 195 लाख टन मछली उत्पादन करके इस क्षेत्र में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन चुका है. जबकि उत्पादन बढ़ाने पर और ज्यादा जोर दिया जा रहा है. हालांकि एक्सपर्ट उत्पादन के साथ—साथ खासकर समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देना की वकालत करते रहे हैं. हाल ही में आंध्र प्रदेश में समुद्री खाद्य निर्यात पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था, जहां ये मुद्दा भी उठाया गया. इस दौरान ओडिशा सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी डी.वी. स्वामी ने इसपर विस्तार से अपनी राय रखी और उनके साथ एमपीईडीए के अध्यक्ष और फूड प्रोसेसिंग उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव पी. जवाहर सह-अध्यक्ष के रूप में मौजूद थे.

इस सत्र में तीन प्रमुख विषय पर चर्चा हुई. पहला निर्यात बाजारों के लिए मछली पकड़ने के प्रमाणीकरण में सहायता के लिए पता लगाने की क्षमता प्रणाली, दूसरा जलीय कृषि और मछली पकड़ने में प्रमाणीकरण और तीसरा समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) ढांचे का पता लगाना. इनके माध्यम से भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया.

अंतर्राष्ट्रीय बाजार की बदलती जरूरतों पर ध्यान देने की है जरूरत
चर्चाओं में अंतर्राष्ट्रीय बाजार की बदलती जरूरतों, विशेष रूप से प्रमुख निर्यात स्थलों में मछली पकड़ने के प्रमाणन मानदंडों को पूरा करने के लिए मत्स्य पालन और पारंपरिक मत्स्य पालन दोनों में ट्रेसिबिलिटी सिस्टम के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला गया.

चर्चाओं में पारदर्शिता, अनुपालन और बाजार तक पहुंच में सुधार के लिए मजबूत डिजिटल ट्रेसिबिलिटी सिस्टम, हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय और मूल्य श्रृंखला में अधिक एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया गया.

सत्र में बाजार तक पहुंच और उपभोक्ता विश्वास को बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण कारकों के रूप में सतत प्रमाणन ढांचे और जिम्मेदार उत्पादन व्‍यवस्‍थाओं की भी चर्चा की गई.

प्रतिभागियों ने भारतीय प्रमाणन प्रणालियों को बढ़ावा देने, स्थिरता पहलों को मजबूत करने और भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया.

समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए संभावित पीएलआई ढांचे पर चर्चाओं में मूल्यवर्धित निर्यात को बढ़ावा देने, एमएसएमई का समर्थन करने की बात कही गई.

वहीं निवेश आकर्षित करने और लक्षित नीतिगत समर्थन और बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से वैश्विक समुद्री खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया.

दूसरे तकनीकी सत्र “समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने में मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि स्टार्टअप और एमएसएमई की भूमिका पर भी चर्चा की गई.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
मछली पालन

Fish Export: उत्तराखंड से नेपाल को एक्सपोर्ट की गई 5 मीट्रिक टन रेनबो ट्राउट मछली

नई दिल्ली. उत्तराखंड सरकार ने पहली बार नेपाल को पांच मीट्रिक टन...