नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के पांच साल पूरे होने के जश्न के हिस्से के तौर पर आयोजित ‘सहकारी इकोसिस्टम को मजबूत करना – अगले 5 वर्षों के लिए आगे की राह’ विषय पर तकनीकी सत्र में भाग लिया. अन्य सम्मानित पैनलिस्टों में बनास डेयरी के चेयरमैन शंकर चौधरी, NABARD के चेयरमैन शाजी केवी, GCMMF अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर जयेन मेहता और ICAI के प्रेसिडेंट प्रसन्ना कुमार डी. शामिल थे. इंडस्ट्री के दिग्गजों ने भारत के सहकारी आंदोलन को बढ़ाने और मजबूत करने की रणनीतियों पर चर्चा की.
सत्र के दौरान बोलते हुए, NDDB के चेयरमैन ने सहकारिता मंत्रालय के साथ साझेदारी में पिछले पांच वर्षों में डेयरी सहकारी क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि लगभग 75 हजार ऐसे गांव जो अभी तक कवर नहीं हुए थे, उन्हें मल्टीपर्पस विलेज कोऑपरेटिव सोसायटियों के माध्यम से डेयरी सहकारी नेटवर्क के तहत लाया जा रहा है, जिससे सहकारी समितियों की पहुंच अधिक ग्रामीण समुदायों तक बढ़ रही है.
प्रजनन, कृत्रिम गर्भाधान, बेहतर चारे और ऐसी तकनीकों पर जोर देने की वकालत
किसानों की आय बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, डॉ. शाह ने सहकारी इकोसिस्टम को मजबूत करने में वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) की भूमिका को रेखांकित किया.
उन्होंने कहा कि सहकारी-संचालित वैल्यू चेन डेयरी कार्यों को अधिक पारदर्शी, कुशल और किसान-केंद्रित बना रही हैं.
भविष्य को देखते हुए, डॉ. शाह ने अगले पांच वर्षों के लिए सहकारी क्षेत्र के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकताओं को रेखांकित किया.
कम विकसित क्षेत्रों, विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों में डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार करना.
किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करने के लिए डेयरी और अन्य सहकारी समितियों के बीच तालमेल को बढ़ावा देना.
पारदर्शिता और परिचालन दक्षता में सुधार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म सहित टेक्नोलॉजी को अपनाने में तेजी लाना.
सहकारी संस्थानों में पेशेवर प्रबंधन और नेतृत्व को मजबूत करना. जिससे किसानों सीधे फायदा पहुंचाया जा सके.
डेयरी उप-उत्पादों को बायोगैस, जैविक उर्वरक और उच्च-मूल्य वाले डेयरी अवयवों जैसे मूल्य-वर्धित उत्पादों में बदलकर सर्कुलैरिटी और स्थिरता को आगे बढ़ाना.
डॉ. शाह ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत में डेयरी विकास के अगले चरण में टिकाऊ उत्पादकता, जलवायु लचीलेपन और मूल्य निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए.
जिसमें प्रजनन, कृत्रिम गर्भाधान, बेहतर चारे और ऐसी तकनीकों पर अधिक जोर दिया जाए जो किसानों की आजीविका का समर्थन करते हुए पशुधन उत्पादकता को बढ़ाती हैं.












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