नई दिल्ली. देशभर में अंडों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और कई जगहों पर अब एक अंडा 8.50 से अधिक का बिक रहा है. पोल्ट्री उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह पोल्ट्री फीड यानि मुर्गियों की डाइट की बढ़ती कीमत है. पोल्ट्री कंपनियों का कहना है कि मुर्गियों के चारे में इस्तेमाल होने वाले मक्का, सोयाबीन और विदेशों के आने वाले कुछ फीड इंग्रीडिएंट्स काफी महंगे हो गए हैं. इसकी एक बड़ी वजह पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष भी है, नियमें आयात और सप्लाई प्रभावित हुई है. वहीं चिकन के दाम में भी तेजी आ गई है.
नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (एनईसीसी) के आंकड़ों के अनुसार, हैदराबार में अंडों की एक्स फार्म कीमत एक महीने में 15 प्रतिशत और पिछले साल के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत बढ़ गई है. पोल्ट्री कंपनी बैंकेटश्वरा हाइब्रिड के मुताबिक, मार्च के बाद से पोल्ट्री फीड में इस्तेमाल होनी वाली सभी चीजें महंगी हो गईं हैं.
55 फीसद इस्तेमाल होता है मक्का
मुर्गियों के फीड में सबसे ज्यादा इस्तेमाल 55 प्रतिशत मक्का होता है और ये भी महंगा हो चुका है.
सोयाबीन खली की हिस्सेदारी करीब 22 प्रतिशत होती है. इसकी कीमत 64 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है.
इसके अलावा, फीड में इस्तेमाल होने वाले अमिनी एसिड की कीमत मार्च से अब 3.5 फीसद बढ़ चुकी है.
असल में मक्का की मांग अब सिर्फ पोल्ट्री फीड तक नहीं है. बल्कि एथेनॉल बनाने वाली कंपनियां भी मक्का खरीद रही हैं.
इससे इसकी कीमतों में तेजी आई है. वहीं दूसरी ओर इस साल अनियमित मानसून ने किसानों और उद्योग की चिंता बढ़ा दी है.
बारिश समय पर और समान्य रूप से नहीं होने से खरीफ और रबी फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है.
सोयाबीन की कीमत चढ़ने की एक और चजह पिछले साल का कम उत्पादन है.
उधोग के मुताबिक, भारत में पिछले साल सोयाबीन का उत्पादन करीष 20 प्रतिशत कम रहा.
अगर इस साल भी मानसून कमजोर रहा तो उत्पादन और घट सकता है, जिससे कीमतें और बढ़ सकती हैं. ब्रॉयलर चिकन का उत्पादन घट गया है.
जिससे बाद में चिकन की कीमत बढ़ गईं. उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, कई शहरों में चिकन का खुदरा धाम 250 में 260 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है.
पोल्ट्री उद्योग को उम्मीद है कि जुलाई के अखिर से अंडों की कीमतों में कुछ कमी आ सकती है.
इसी महीने के दौरान बड़ी संख्या में लोग धार्मिक कारणों से और अंडों का सेवन कम कर देते हैं.
हालांकि, अगर मानसून सामान्य नहीं रहा और मक्का व सोयाबीन की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो अंडा और चिकन की कीमतें और बढ़ सकती हैं.












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