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Fish Farming: योजना के जरिए महिलाओं को मछली पालन के काम से जोड़कर बनाया जा रहा आत्मनिर्भर

जब पूरी जानकारी होगी तो नुकसान का चांसेज कम होगा और इससे मुनाफा ज्यादा होगा. इसलिए अगर आप मछली पालन करना चाहते हैं तो जरूरी है कि मछली को खाना खिलाया जाता है उसकी जानकारी तो कम से कम कर लें.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश की सरकार लगातार प्रोत्साहन दे रही है और विभिन्न योजनाओं से जोड़कर उनकी कमाई का जरिया बना रही है. मौजूदा समय में राज्य में हजारों महिलाएं, ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से मछली पालन का काम कर रही हैं. सिर्फ बांदा जिले की ही बात कर ली जाए तो विभिन्न क्षेत्रों में करीब 19 समूह करीब 82 बायो फ्लॉक टैंकों में मछली पालन का काम कर रहे हैं. मछली पालन के क्षेत्र से जुड़कर महिलाएं खासा मुनाफा कमा रही हैं. बताया गया है कि मछलियों के उत्पादन से लेकर बिक्री तक की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार से नामित प्राइवेट कंपनी उठा रही है.

ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद सरकार कर रही है. विभिन्न महिला समूहों को मत्स्य पालन से जोड़कर उन्हें कमाई का जरिया उपलब्ध कराया जा रहा है. आंकड़ों के मुताबिक जिले के चार विकासखंडों में 19 महिला समूह मछली पालन के व्यवसाय से जुड़े हैं.

30 हजार रुपए की मिलती है मदद
महिलाओं की सुविधा के लिए बबेरू ब्लाक में आधा सैकड़ा, बिसंडा में 22 और नरैनी में 10 स्थानों पर बायो फ्लक टैंक स्थापित किए गए हैं, जिनमें महिला समूह मछली पालन का काम कर रहे हैं.

मत्स्य पालन विभाग के मुताबिक मछली पालन के क्षेत्र में रुचि लेने वाले महिला समूहों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सब्सिडी दिलाने की प्रक्रिया भी चल रही है.

बताया कि एक बायोफ्लॉक टैंक बनाने में करीब 60 हजार रुपए का खर्च अनुमानित है, जबकि इसमें 30 हजार रुपए की सब्सिडी का प्रावधान है.

प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जहां महिला समूहों को विभिन्न रोजगारों से जुड़ने के अवसर प्रदान किए जाते हैं.

वहीं मछली पालन के व्यवसाय से जुड़कर महिलाएं अच्छा मुनाफा कमा सकती हैं और अपने समूह को समृद्ध बना रहीं हैं.

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के डिप्टी कमिश्नर भइयन लाल ने बताया कि जनपद के चार विकासखंडों में अभी स्टार्टअप के रूप में समूहों को मछली पालन से जोड़ा गया है.

जबकि आगे आने वाले समय में समूचे जनपद के समूहों को मछली पालन से जोड़ा जाएगा.

बताया कि मछली पालन के क्षेत्र में महिलाएं रुचि ले रही हैं और व्यवसाय से होने वाले मुनाफे से समूहों को समृद्ध बनाने का काम कर रही हैं.

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