नई दिल्ली. मुर्गी पालन में सबसे ज्यादा खर्च मुर्गियों की फीड के ऊपर आता है. एक औसत के मुताबिक तकरीबन 70 फीसद का खर्च मुर्गी पालन में फीड के ऊपर ही होता है. इसलिए पोल्ट्री फार्मर्स हमेशा इस कोशिश में रहते हैं कि कैसे मुर्गियों को सस्ता और अच्छा फीड खिलाकर पोल्ट्री फार्मिंग की लागत को काम किया जाए. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन दिनों पोल्ट्री फीड पर महंगाई का संकट मंडरा रहा है. पोल्ट्री फीड काफी महंगे हो चुके हैं. इसके चलते पोल्ट्री फार्मिंग की लागत भी बढ़ गई है.
पोल्ट्री फीड महंगा होने के चलते मुर्गी पालकों को इस काम में जितना मुनाफा होना चाहिए उतना नहीं हो रहा है. इससे पोल्ट्री फार्मर्स बेहद ही परेशान नजर आ रहे हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि मक्का और सोयाबीन के दाम किसानों को ज्यादा नहीं मिल रहे हैं लेकिन पोल्ट्री फार्मर्स को ये महंगा मिल रहा है. हालांकि पोल्ट्री फार्मर्स को नुकसान न हो इसके लिए कई उपाय भी किए जा रहे हैं.
जानें कितना बढ़ा है दाम
बता दें कि पोल्ट्री फीड में सबसे ज्यादा सोयाबीन और मक्का का इस्तेमाल किया जाता है और इन दिनों दोनों ही के दाम में इजाफा हो गया है.
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पिछले कुछ हफ्तों में फीड के दाम में 40 फीसद से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया है.
इसलिए पोल्ट्री फार्मर्स के मुनाफे में काफी ज्यादा कटौती देखने को मिली है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट फीड के दामों में हुए इजाफे को पोल्ट्री फार्मिंग के लिए खतरा मान रहे हैं.
हालांकि नुकसान को कंट्रोल करने के लिए ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन जैसे प्रमुख संगठनों ने मुर्गी उत्पादन में 25% की कमी करने के लिए कहा है.
इसके साथ ही पैरेंट ब्रिडर मुर्गियों की छंटाई करने करने का भी फैसला लिया गया है.
वहीं फीड की बढ़ती कीमतों को काबू करने के लिए इस सेक्टर से जुड़े लोगों ने सोयाबीन और अन्य जरूरी कच्चे माल की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने और सीमित आयात की मांग को फिर से दोहराया है.
निष्कर्ष
एक बात तो फैक्ट है कि पोल्ट्री फार्मिंग जैसे काम में यदि फीड के दामों में इजाफा होता है तो फिर इससे पोल्ट्री फार्मर्स को नुकसान होगा. वहीं दाम ज्यादा बढ़ा तो चिकन और अंडे पर भी इसका असर दिखाई देना तय है.











