Home पशुपालन Scheme: पशुपालन में महामारी, प्राकृतिक आपदा और दुर्घटनाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई करेगी सरकार
पशुपालन

Scheme: पशुपालन में महामारी, प्राकृतिक आपदा और दुर्घटनाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई करेगी सरकार

cow and buffalo cross breed
गाय और भैंस की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना’ (राज्य योजना) के लिए कार्ययोजना और वित्तीय प्रावधानों को मंजूरी दी गई. इस योजना का उद्देश्य राज्य के किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों को पशुओं की मौत या दुर्घटनाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है. वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान इस योजना को लागू करने के लिए 60 करोड़ रुपए के बजट प्रावधान किया गया है. राज्य सरकार बीमा प्रीमियम का 85% हिस्सा वहन करेगी.

पशुधन और डेयरी विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में पशुपालन आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत है. “अगर किसी कारण से पशु की मौत हो जाती है या वह काम करने के लिए स्थायी रूप से अक्षम हो जाता है, तो इसका पशुपालक की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता है. उन्हें ऐसे संकटों से बचाने के लिए राज्य सरकार ने इस नई योजना को मंज़ूरी दी है.”

पशुओं का किया जाएगा बीमा
इस योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों, भूमिहीन पशुपालकों, डेयरी किसानों और अन्य पात्र पशुपालकों के पशुओं का बीमा किया जाएगा.

यदि किसी महामारी, प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना के कारण पशु की मौत हो जाती है या वह उपयोग के लायक नहीं रहता है, तो बीमा के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी.

राज्य सरकार ने इस योजना के तहत क्लेम सेटलमेंट (दावा निपटान) की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है.

पशु की मौत की स्थिति में, बीमा क्लेम मंज़ूर होने के बाद क्लेम की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी.

इसी तरह, यदि कोई पशु स्थायी रूप से विकलांग (PTD) हो जाता है, तो बीमा कंपनी बीमित राशि का 75 परसेंट तक भुगतान करेगी.

इस योजना के तहत उन पशुओं के बीमा को प्राथमिकता दी जाएगी जिन्हें राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न पशुपालन और डेयरी विकास योजनाओं के तहत लाभ मिला है.

कैबिनेट से मंजूर प्रस्ताव के तहत, वित्त वर्ष 2026-27 में इस योजना को लागू करने के लिए ₹60 करोड़ का बजट रखा गया है. इस बजट से राज्य में कुल 2,28,350 पशुओं का बीमा किया जाएगा.

इनमें से 1,86,800 पशुओं का बीमा ‘जनरल कंपोनेंट’ के तहत और 41,550 पशुओं का बीमा ‘SCSP कंपोनेंट’ के तहत किया जाएगा.

इस योजना के तहत, राज्य सरकार बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा उठाएगी, जबकि लाभार्थी बाकी 15 प्रतिशत का योगदान देंगे.

धर्मपाल सिंह ने बताया कि पशुधन के मामले में उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है. GDP के लिहाज़ से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में पशुधन का योगदान 5.50 प्रतिशत है.

राज्य की GDP में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों का योगदान 30 प्रतिशत से ज़्यादा है, जिसमें पशुधन का अहम योगदान है.

पशुधन विदेशी मुद्रा कमाने का जरिया भी है. ‘मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन और पशुधन बीमा योजना’ सभी 75 ज़िलों में लागू की जाएगी.

उन्होंने आगे कहा कि सरकार का हिस्सा 85 प्रतिशत होगा, जिसमें केंद्र का 51 प्रतिशत और राज्य का 34 प्रतिशत हिस्सा शामिल होगा. जबकि लाभार्थी का योगदान 15 प्रतिशत होगा.

योजना के तहत, बीमा कंपनी एक महीने के भीतर बीमा राशि का भुगतान सुनिश्चित करेगी. यह बीमा योजना पशुपालकों को काफ़ी फ़ायदा पहुंचाएगी.

मंत्री ने कहा कि आवारा मवेशियों को गौ-संरक्षण केंद्रों में लाया जा रहा है. राज्य में 7,500 गौ-संरक्षण केंद्र हैं.

जहां लगभग 13.50 लाख गायों को रखा जा रहा है. सरकार उनकी देखभाल पर हर दिन 8 करोड़ रुपए खर्च कर रही है.

उत्तर प्रदेश चारा नीति के तहत, ग्राम समाज और वन विभाग की ज़मीन पर हरा चारा उगाया जा रहा है और उसे गौशालाओं में भेजा जा रहा है.

निष्कर्ष
इससे न सिर्फ़ पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि पशुपालन और दूध उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

ब्रुसेलोसिस ब्रुसेला बैक्टीरिया के कारण होता है जो मुख्य रूप से पशुधन (जैसे गाय, भेड़, बकरी) में पाए जाते हैं.
पशुपालन

Animal Husbandry Tips: एफएमडी से बचाने के लिए पशु के खुरों को फिनाइल के पानी से धोएं

नई दिल्ली. खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) बेहद ही खतरनाक बीमारी में से एक...

CIRB will double the meat production in buffaloes, know what is the research on which work is going on. livestockanimalnews animal Husbandry
पशुपालन

Animal Husbandry: पशुपालन में रेट वाटर डिजीज है बेहद खतरनाक, उत्पादन पर पड़ता है बुरा असर

नई दिल्ली. पशु को कई बीमारियां होती हैं. जिससे उनका उत्पादन और...