नई दिल्ली. केंद्र सरकार बहुत पहले ही ये ऐलान कर चुकी है कि किसानों की इनकम को दोगुना किया जाएगा. हालांकि सिर्फ कृषि से इसको करना मुश्किल है. इसलिए सरकार की तरफ से कोशिश की जा रही है कि पशुपालन और मछली पालन जैसे कामों से इसे किया जाए. बात अगर मछली पालन की करें तो मछली पालन वहां भी किया जा सकता है, जहां की जमीन कृषि योग्य नहीं है. जबकि मछली पालन की नई तकनीकों का फायदा उठाकर जैसे बायोफ्लॉक और आरएएस के जरिए कम जगह पर मछली पालन करके अच्छी कमाई की जा सकती है.
यही वजह है कि सरकार ऐसे लोगों की मदद कर रही है जो मछली पालन के काम में पहले से हैं या फिर वो मछली पालन का काम करना चाह रहे हैं. ऐसे लोगों को आर्थिक मदद देकर सरकार मछली पालन के काम को बढ़ावा देने का काम कर रही है. इससे लोग मछली पालन के काम में खुद को मजबूत कर रहे हैं और अपनी इनकम को बढ़ा रहे हैं. जिसका फायदा उन्हें हो रहा है. बिहार सरकार के डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर से भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं.
सरकार से मिली 14 लाख की मदद
विभाग की तरफ से चल रही योजना का फायदा कैमूर जिले के रामगढ़ इलाके के बसंत कुमार को हुआ है और इनकम बढ़ाने में सफल रहे हैं.
कभी सीमित संसाधनों और कम आय से जूझने वाले कैमूर जिले के रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत जमुरना ग्राम के बसंत कुमार आज एक सफल मत्स्य उद्यमी बन चुके हैं.
उनकी इस कामयाबी के पीछे है उनकी कड़ी मेहनत और सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) का सही साथ है.
साल 2020-21 में नए तालाब और 2024-25 में मध्यम बायोफ्लॉक टैंक निर्माण के लिए उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से लगभग 14 लाख की अनुदान सहायता मिली.
इस आर्थिक मदद के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से IMC और पंगासियस मछलियों का उत्पादन शुरू किया.
अपनी मेहनत और सरकारी मदद से आज वे सालाना 20 से 25 लाख रुपए का कारोबार कर रहे हैं और 8 से 13 लाख तक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं.
बसंत सिर्फ खुद आत्मनिर्भर नहीं बने, बल्कि उन्होंने स्थानीय स्तर पर 10 से 12 लोगों को रोजगार भी दिया है.
निष्कर्ष
उन्होंने जब 10 से 12 लोगों को रोजगार दिया तो इससे और लोगों को फायदा हुआ है. अफसरों का कहना है किसान चाहें तो बंसत की तरह सफल मछली पालक बनकर न सिर्फ खुद अच्छी कमाई कर सकते हैं बल्कि दूसरों को रोजगार भी दे सकते हैं.











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